अमर उजाला ब्यूरो
झिंझाना (शामली)। दूर की रिश्तेदारी होने की वजह से तीनों सहेलियों में काफी अपनापन था। यही वजह थी कि नगमा को डूबता देख अलीना ने उसे बचाने की कोशिश की, वो भी डूबने लगी तो गुल्लो बिना कोई परवाह किए उसे बचाने को को कूद गई। इस हादसे के बाद मौके पर जो भी पहुंचा हर कोई दुखी था, लोग बाकी दोनों सहेलियों की कुशलता की दुआएं कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जब नदी में नहाते समय सबसे पहले नगमा गहरे पानी में डूबने लगी, तो उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। यह देखकर उसकी सहेली अलीना ने उसे बचाने के लिए गहरे पानी में छलांग लगा दी थी। जब वह भी डूबने लगी तो तीसरी सहेली गुल्लो भी स्वयं को नहीं रोक पाई और वह भी उन दोनों को बचाने की खातिर पानी में कूद गई ओर एक दूसरे का हाथ पकड़ने की कोशिश की। जब तीनों सहेलियां पानी में डूब रही थी, तो पास ही तरबूज और खरबूजों की प्लेज में काम कर रहे किसानों ने उन्हें बचाने को प्रयास भी किए, लेकिन सफल नहीं हुए। चौतरा के किसान ताहिर ने बताया की जब तीनों किशोरियां पानी में डूब रही थी तो उसने उन्हें बचाने का प्रयास किया था लेकिन वह उन्हें बचा नहीं पाया उसी ने अन्य किसानों को इस हादसे की जानकारी दी।
मुझे तो यकीन नहीं होता कि मेरी बेटी चली गई
झिंझाना। यमुना के पानी में डूबी नगमा निवासी रामड़ा थाना कैराना पांच भाई बहनों में अपने परिवार मेें सबसे बड़ी थी। इसके बाद भाई अहसान व अली के अलावा दो छोटी बहनें हिरम और नूरक है। अलीना अपने परिवार में आठ भाई बहनों में तीसरे नंबर की थी। सबसे बड़ा भाई उमर, दूसरा अलीशान, तीसरा शाद और बहनों में समेलिना, नाहिला, उमेरा व साजिया है।
परिवार में छाई मायूूसी
यमुना में डूबी दोनों किशोरियों परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। बुुधवार की घटना ने परिवार को तोड़ दिया है। तीनों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। अलीना के पिता इरशाद ने बताया कि उनकी बेटी पूरे परिवार की चहेती थी। रामड़ा निवासी वाजिद ने बताया की उसकी पुत्री कब यमुना में नहाने चली गई उसे पता ही नहीं चला है। मुझे अभी भी यकीन नहीं होता कि मेरी बेटी चली गई है।
रोजा खोलने की नहीं, बच्चियां बचाने की चिंता
रमजान का महीना होने के बाद भी पानी में डूबी किशोरी को तलाश रहे गोताखोरों ने बताया की रोजा खोलने का समय होने के बाद भी वह अपने काम में लगे रहे। बाद में घर पहुंचकर उन्होंने रोजा खोला। कुछ ने कहा कि यदि उनकी कोशिश से दोनों बच्चियां बच जाएं तो उनका रोजा सफल हो जाएगा।
यमुना में बने मौत के कुंड ले रहे जान
यमुना किनारे गांवों में हो रहा खनन, बन रहे गहरे गड्ढे
झिंझाना/ कैराना। यमुना किनारे गांवों में हुए नदी में अंधाधुंध खनन के चलते मौत के कुंड बन गए हैं। इन्हीं गड्ढों में फंसकर लोग मौत के शिकार हो रहे हैं।
दरअसल यमुना नदी के किनारे पड़ने वाले गांवों में खनन खूब हो रहा है। कुछ आसपास के ग्रामीण ही इस काम को कर रहे हैं। पानी उतरने के बाद रेत खनन होता है। जिससे गहरे गड़ढे बन जाते हैं। यमुना में पानी आने पर ये गड्ढे पानी में ढक जाते हैं और यमुना स्नान को आने वाले लोगों को इन गड्ढों का आभास नहीं हो पाता और इनमें पैर जाने पर वे कुंड में फंसकर मौत के मुंह में समा जाते हैं। इस घटना से पहले पिछले 15 दिनों में कैराना क्षेत्र में चार लोग यमुना में डूबकर जान गवा चुके हैं। चार दिन पहले ही बुध पूर्णिमा स्नान पर नहा रही मां बेटियों को बचाने के चक्कर में हरियाणा के थाना सनौली का रहने वाला इकलौता बेटा अंशु यमुना में डूब गया था। इससे पहले भी हरियाणा के 17 वर्षीय छात्र अमन तथा हरियाणा के ही 35 वर्षीय रमेश की भी यमुना में डूबने से मौत हो गई थी।