शामली। कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं आत्मा योजना के अंतर्गत कृषि उपनिदेशक कार्यालय पर जिला स्तरीय रबी गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कृषि विशेषज्ञों ने जैविक खादों के प्रयोग, उन्नतबीज और सहफसली खेती से अधिक लाभ कमाने की सलाह किसानों को दी। वहीं, वर्मी कंपोस्ट और सोलर पंप के चयनित कृषकों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
मंगलवार को कृषि उपनिदेशक कार्यालय पर गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल में पीला रतुवा रोग का प्रकोप होता है। इस रोग के निवारण के लिए रसायन प्रोपीकोनाजोल नामक दवाई का छिड़काव फसल में करना उपयोगी होता है। साथ ही गेहूं की फसल में सिंचाई का उचित मात्रा में ही प्रयोग करें। पशुपालन विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डाक्टर सहेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि पशुओं को बान्ध्य रोग से बचाने के लिए हरे चारे का प्रयोग अधिक करना चाहिए। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए रातव और दाना खिलाना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र बघरा से आए वैज्ञानिक डाक्टर शिवकुमार ने बताया कि गन्ने की फसल से अधिक आय प्राप्त करने के लिए गन्ने के साथ सहफसली खेती करनी उपयोगी है। इसमें गन्ने के साथ मूंग, उड़द, चना, मटर की फसल लगाई जा सकती हैं। कृषि उपनिदेशक डाक्टर रामवीर कटारा ने मृदा परीक्षण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना करने पर किसानों को छह हजार रुपये अनुदान दिया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी रेनू तिवारी ने बताया कि कृषकों को रसायनिक खादों के साथ ही जैविक खाद, जैसे गोबर, वर्मी कंपोस्ट, हरी खाद का प्रयोग भी बढ़ाना चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष पति प्रसन्न चौधरी ने किसानों से आह्वान किया कि कृषक गोष्ठी और किसान मेलों में प्रतिभाग करके किसानों को सरकार की तरफ से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। इस दौरान जिला कृषि अधिकारी डाक्टर हरिशंकर, भूमि संरक्षण अधिकारी डाक्टर नीरजा सिंह, उप परियोजना निदेशक (आत्मा) डाक्टर सुबोध कुमार, जिला पंचायत सदस्य देशराज भनेड़ा, सोमपाल मलिक, जनक सिंह, श्याम सिंह, सतपाल पहलवान, ब्रजपाल, महमूद हसन, मुनव्वर, अनिल, सत्यप्रकाश आदि मौजूद रहे।