सरस साहित्य समिति की ओर से में हास्य कवि राजूू रंगीला के 59वें जन्मदिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। सोमवार शाम हनुमान धाम के निकट स्थित एक रेस्टोरेंट में काव्य सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि अंसार सिद्दीकी और विशिष्ट अतिथि सूर्यवीर सिंह ने किया।
गीतकार लाल सिंह लचक ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कैराना के शायर अंसार सिद्दीकी ने एक से बढ़कर एक शेर सुनाए। कहा मुश्किल नहीं है टूटे हुए दिल का जोड़ना, समझो तो पहले कौन सा टुकड़ा कहां का है, ले जा रही हैं बेखुदी अब किसके घर मुझे, शायद यह रास्ता तो मेरे ही मकां का है। हास्य कवि पवन कुमार पवन ने अपनी कविता यूं पढ़ी- मुझसे जब सामना हो गया, खुद से वो आशना हो गया। उसने ही मारा पत्थर मुझे, जिसका में आइना हो गया। वीर रस के कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने अपनी कविता में कहा- सांप्रदायिकता का जहर न सींचो, मेरे देश की मूल में। देखो शान न धूमिल हो जाए, कड़वाहट की धूल में।
कवि सुनील अरोरा टम्मी ने लोगों ने यूं गुदगुदाया कि ना आंखों से छलकते है- ना कागज पर उतरते है, कुछ दर्द ऐसे होते है-वो भीतर पलते हैं। अनिल पोपट कामचोर ने अपनी कविता से हंसा हंसाकर लौटपोट कर दिया। मौके पर पंडित राजीव भावज्ञ, पपीद्र मलिक, मनोज वर्मा, मनोज मित्तल, रेखा वर्मा, शुभम रंगीला, पंडित अजय पाठक, डॉ. राकेश कौशिक, अनुराग शर्मा ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता डॉ. विपिन कौशिक और संचालन सुनील अरोरा ने किया।