उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नितिन चौधरी से कहा तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। किट शाहजहांपुर से भेजी जानी थी। इसके बाद किट मंगाने के लिए प्रयास शुरू किए गए। शाम करीब सात बजे किट सीएचसी पर भेजी गई तब आशा वर्कर भड़क गईं। उन्होंने आधी-अधूरी तैयारियों के बीच कैंप आयोजित कराने का विरोध कराते हुए महिलाओं की नसबंदी कराने से इन्कार कर दिया।
उनका कहना था कि 20 से 25 किलोमीटर दूर अपने बच्चों को छोड़कर आईं महिलाएं देर रात में घर पहुंचने पर खतरा बना रहेगा। ऐसे में उनकी मान-मनौव्वल शुरू हुई, तब भी बात नहीं बनीं। देर शाम को नसबंदी कराने आईं महिलाओं को एंबुलेंस से घर भेजा गया। बताया जा रहा है कि तीन दिन बाद फिर शिविर आयोजित किया जाएगा।
शिविर लगा लिया, व्यवस्थाएं नहीं कराईं
परिवार नियोजन के तहत नसबंदी का लक्ष्य पूर्ण करने के लिए महिलाओं को बुला लिया, लेकिन उनके लिए व्यवस्थाएं नहीं कराई गईं। उनके लिए बैठने के लिए पर्याप्त इंतजाम तक नहीं किया गया। इंजेक्शन लगने के बाद कुछ महिलाओं को बेड मिल पाया, शेष सर्दी में इधर-उधर परेशान होती रहीं।
मदनापुर में रह गई थी किट
किट लेकर आए परिवार नियोजन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि मदनापुर में कैंप होने के चलते किट वहीं रह गई थी। सूचना आने के बाद किट मंगाई, तब तक रात हो चुकी थी। एक घंटे में पांच नसबंदी की जाती है। देर अधिक होने के कारण नसबंदी नहीं हो सकी हैं।
निगोही के एमओआईसी डॉ. नितिन ने बताया कि इस साल का सबसे बड़ा शिविर हमने लगाया था। इसे संबंधित डॉक्टरों ने फेल करा दिया। शाम तक उपकरण का इंतजार ही करते रह गए।
नोडल अधिकारी डॉ. गोविंद स्वर्णकार ने बताया कि टूल किट भेजी गई थी। उसमें एक उपकरण नहीं था। इसके चलते नसबंदी नहीं हो सकी है। टूल किट के उपकरणों की जानकारी सर्जन को रखनी चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है।