फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला समूहों को उत्पादों की बिक्री के लिए नहीं मिल रहा बाजार

विज्ञापन
शाहजहांपुर में जिला सहकारी बैंक के मुख्यालय परिसर में आयोजित शरद मेला में एक स्टाल पर महिला स्वय? - फोटो : SHAHJAHANPUR
विज्ञापन
शाहजहांपुर। नाबार्ड और जिला सहकारी बैंक के सहयोग से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) द्वारा गठित महिला स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों के लिए बाजार नहीं मिल रहा है। नाबार्ड और नारी कल्याण प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से डीसीबी परिसर में लगाए दो दिवसीय शरद मेला में विभिन्न समूहों ने जैविक खाद्य उत्पाद, वर्मी कंपोस्ट, नेकलेस, हेयर क्लिप, मसाले और पर्यावरण के अनुकूल दैनिक उपयोग की सामग्री बनाई है।
विज्ञापन

इन सभी वस्तुओं की बिक्री भी हुई, लेकिन समूहों की महिलाओं का कहना है कि उन्होंने जो सामान तैयार किया है, उसकी बाजार में ज्यादा मांग नहीं है।
गंगसरा (पुवायां) के तुलसी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अपने स्टाल पर कपड़ा, गत्ता और कागज से ट्रैवलिंग बैग, कैरी बैग और आकर्षक लिफाफे प्रदर्शित किए। कपड़े का ट्रैवलिंग बैग महज 200 रुपये में और कैरी बैग 30 से 35 रुपये का है। वहीं के राधे-राधे महिला स्वयं सहायता समूह ने महिलाओं के शृंगार में प्रयुक्त होने वाले मोतियों के नेकलेस सेट, हेयर बैंड, हेयर क्लिप प्रदर्शित कीं। इन वस्तुओं की कीमतें 200 से 500 रुपये है। रघुनाथपुर (पुवायां) के गुलाब स्वयं सहायता समूह ने अचार, गुड़, सोंठ और तिल के लड्डू बनाए हैं।
गंगसरा के ज्योति स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने केंचुआ से तैयार वर्मी कंपोस्ट खाद के एक किलो के पैकेट सिर्फ दस रुपये में उपलब्ध कराए और वीरांगना समूह की महिलाओं ने जैविक विधि से तैयार काले गेहूं का आटा, बासमती चावल आदि प्रदर्शित किए। समूहों से जुड़ी महिलाएं बाजार से इन वस्तुओं को तैयार करने के आर्डर नहीं मिलने से इसका लाभ नहीं मिल रहा है। डीसीबी के चेयरमैन धर्मेंद्र प्रताप सिंह और बैंक के महाप्रबंधक सौरभ द्विवेदी का कहना है कि महिला समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए उनके उत्पादों की विपणन व्यवस्था बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
विज्ञापन

समूहों से जुड़ीं महिलाओं केे बात
महिलाओं के प्रसाधन और शृंगार की जो चीजें तैयार की हैं, उनके रेट बाजार की तुलना में कम रखे हैं। ऐसा इसलिए किया कि हमारा सामान बिके और उसमें लगाई गई रकम वापस मिल सके। बाहर से सामान मंगाने वाले दुकानदार हमारा सामान दुकान पर रखने में आनाकानी करते हैं। -अंजली प्रजापति, गंगसरा (पुवायां)
हमारे समूह ने ऐसा सामान बनाने पर ध्यान दिया जो प्रयोग के बाद प्रदूषण न बढ़ाएं। बांसी कागज के लिफाफे लागत मूल्य पर बेचे जा रहे हैं, लिफाफे और केरी बैग थोड़े महंगे हैं। उनकी बाजार से कीमत कम है, लेकिन लोग सराहना की तुलना में खरीदारी कम कर रहे हैं। -अनामिका सिंह, गंगसरा (पुवायां)
गुड़, तिल और सोंठ आदि के मिश्रण से लड्डू तैयार किए हैं। लड्डू के 120 रुपये कीमत वाले कई डिब्बे बिक गए। इन दिनों गजक की ज्यादा खपत होने से बाजार में मांग बढ़ गई है। लड्डू बाजार पहुंच जाएं तो लोग हाथों-हाथ लेंगे, लेकिन हमारी दुकान नहीं है। -पूनम कश्यप, रघुनाथपुर (पुवायां)
भूमि संरक्षण और स्वास्थ्य संबंधी विकारों में कमी लाने के लिए सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसीलिए ज्योति स्वयं सहायता समूह ने वर्मी कंपोस्ट खाद का उत्पादन किया है। हमारे समूह की खाद बाजार पहुंच जाए तो बिक्री कई गुना बढ़ जाएगी। -वंदना राजपूत, शाहजहांपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें