तिलहर में हजरत मौलाना लियाकत हुसैन की दरगाह पर चादर चढ़ाते अकीदतमंद। संवाद
तिलहर। मौलाना लियाकत हुसैन फाजिले तिलहरी के 27वें दो दिनी उर्स-ए-लियाकती का आगाज मोहल्ला कांकड़ स्थित उनकी दरगाह में सोमवार को परचम कुशाई की रस्म के साथ हो गया। कई प्रांतों से शिरकत करने आए उनके अकीदतमंद और मुरीदों ने दरगाह पर चादरपोशी करते हुए देश में अमन और चैन की दुआ की।
दरगाह परिसर में साहब-ए-सज्जादा मौलाना मुहम्मद स्वालेह कादरी उर्फ शद्दन मियां की निगरानी में उर्स की सभी रस्में अदा की गईं। परचम कुशाई के दौरान उलेमा, शायर, मुरीद आदि ने कलाम पढ़े। सुबह दरगाह व मस्जिद में कुरआनख्वानी का आयोजन हुआ। बाद में मौलाना अकील रजा ने मौलाना लियाकत हुसैन फाजिले तिलहरी के जीवन पर प्रकाश डाला। साहिबे सज्जादा मुहम्मद स्वालेह कादरी उर्फ शद्दन मियां ने शिजरा पढ़कर मुल्क की तरक्की, अमन व भाईचारा की दुआ की।
इस मौके पर रेहान अरशद, मोहम्मद सुहेल खां, मोहम्मद हामिद खां, शौकत खां, अरफान रजा, मौलाना अकील रजा मौजूद रहे। शद्दन मियां ने बताया कि कुल शरीफ मंगलवार को सुबह 9:45 पर दरगाह शरीफ परिसर में दुआ के साथ संपन्न होगा।
बहराइच के मुफ्ती सुल्तान रजा नूरी बताते हैं कि वह पिछले 15 वर्षों से हजरत मौलाना लियाकत हुसैन उर्फ फाजिल ए तिलहरी की दरगाह पर आ रहे हैं। यहां आने वाले हर शख्स की आरजू पूरी होती है। जयपुर से आए मोहम्मद शाहरुख कहते हैं कि वह बचपन से यहां आ रहे हैं। यहां आकर दिली तमन्नाएं पूरी होती हैं। जयपुर से पहली बार आए मोहम्मद जलालुद्दीन अपने को बहुत खुशनसीब मानते हैं।