जिला अस्पताल में डॉक्टर की पिटाई और तोडफ़ोड़ के मामले में स्वास्थ्य कर्मचारी और अधिकारी संघर्ष समिति ने सोमवार से पूर्ण कार्य बहिष्कार करने का फैसला लिया है। इससे इमरजेंसी और पोस्टमार्टम सेवाएं छोड़कर समस्त सेवाएं ठप रहेंगी। शनिवार को भी दूसरे दिन स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रदर्शन कर कार्य बहिष्कार किया।
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बीते सोमवार को मोहल्ला महमंद जंगला में रहने वाले अजीम के गोली लगने बाद परिवार और साथ के लोग उसे जिला अस्पताल लेकर आए थे। इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की पिटाई कर दी थी और ट्रामा सेंटर में जमकर तोडफ़ोड़ की थी। घटना के बाद स्वास्थ्य कर्मी अनशन पर बैठ गए थे। अधिकारियों के समझाने के बाद उन्होंने अपना अनशन वापस ले लिया था। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर 11 सितंबर से दो घंटे का कार्य बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी। कोतवाली पुलिस ने आननफानन में तीन युवकों को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। स्वास्थ्य कर्मियों में इस बात का आक्रोश है कि कोतवाली पुलिस ने उच्चाधिकारियों की इसकी सूचना नहीं दी। तीनों आरोपियों के फोटो कराए और सीसीटीवी कैमरे में आए फुटैज से मिलान किया जा सके। तीनों आरोपियों को डॉक्टर से पहचान कराई जा सकती थी, लेकिन पुलिस ने इसकी जरूरत नहीं समझी। शनिवार को दो घंटे के कार्य बहिष्कार में चिकित्सक, फार्मेसिस्ट, पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हुआ। आंदोलन में समिति अध्यक्ष डॉ. अजय नागर, डॉ. एयूपी सिन्हा, डॉ. एसपी आर्या, डॉ. ओपी गौतम, डॉ.केपी सिंह, डॉ. शबाहत हसैन, डॉ. जेडी बंसल, डॉ. सुरेश कुमार डॉ. ओएस कनौजिया, डॉ. सुभाष कनौजिया, डॉ. वीके सिंह, डॉ. वीके गंगवार आदि शामिल थे।