शाहजहांपुर। निगोही की डेढ़ लाख की आबादी के लिए स्थापित सीएचसी और दो अतिरिक्त पीएचसी होने के बाद भी मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा। मरीजों को सामान्य बीमारी की दवा मिल जाती है पर गंभीर राेगियों को रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
कस्बे में स्थापित सीएचसी की ओपीडी में रोजाना करीब साढ़े चार सौ मरीज आते हैं। इनके उपचार के लिए एमबीबीएस डॉ. नितिन चौधरी, डॉ.सबिहा सुम्बुल, डॉ.तरुण कनौजिया तैनात हैं। डॉ. चौधरी चिकित्सा अधीक्षक होने के चलते विभागीय कार्य भी देखते हैं। इसके अतिरिक्त डेंटल सर्जन डॉ. स्वाति और तीन के सापेक्ष एकमात्र फार्मासिस्ट की नियुक्ति है। विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होने के चलते मरीजों का उपचार नहीं पा रहा है। निगोही के अलावा सिंधौली, खुदागंज और तिलहर सीमा तक के गांवों के मरीज भी आते हैं। उन्हें भी बुखार, खांसी, जुकाम की दवा देकर लौटाया जाता है। गंभीर मरीज होने पर रेफर किया जाता है। एमओआईसी डॉ.नितिन चौधरी ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण मरीजों का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है।
एक्स-रे की व्यवस्था, टेक्नीशियन नहीं
-सीएचसी पर एक्स-रे की व्यवस्था होने के बाद भी मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। टेक्नीशियन नहीं होने के चलते मरीजों को लौटना पड़ता है। इसी तरह लैब टेक्नीशियन नहीं हैं। सहायक के जरिये ही मरीजों के खून की जांच की जा रही है।
एएनएम से कराते हैं प्रसव
-सीएचसी में रात को प्रसव एएनएम से कराया जाता है। रात में महिला डॉक्टर के ड्यूटी पर नहीं रहने के कारण गर्भवती महिलाओं को दिक्कत आती है। इसके अतिरिक्त प्रसूता की स्थिति गंभीर होने के चलते तुरंत रेफर कर दिया जाता है।
अतिरिक्त पीएचसी में चार दिन नहीं मिलते डॉक्टर
-निगोही में अतिरिक्त पीएचसी परसौना खलीलपुर में तीन माह पहले डॉक्टर का तबादला होने के बाद यहां पर मात्र तीन दिन ही डॉक्टर मिलते हैं। उन्हें निगोही से संबद्ध किया गया है। शेष दिन फार्मासिस्ट ही मरीज देखते हैं। इसके अतिरिक्त अतिरिक्त पीएचसी लोहरगवां में आयुष चिकित्सक डॉ.गिरीश कुमार तैनात हैं। वह मरीजों का सामान्य उपचार ही करते हैं।
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सीएचसी में दो एमबीबीएस डॉक्टर के अलावा दो अन्य डॉक्टर भी तैनात किए गए हैं। निगोही में स्वास्थ्य सुविधाएं काफी बेहतर हैं। यदि कुछ कमियां हैं तो उन्हें दुरुस्त किया जाएगा।
डॉ.आरके गौतम, सीएमओ