शाहजहांपुर। अपर सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ कुमार वागव ने दुष्कर्म के मामले में दो सगे भाइयों समेत तीन दोषियों को दस-दस वर्ष के कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया। इसी मुकदमे में शेष तीन दोषियों को सात-सात वर्ष की सजा और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। एक आरोपी बड़े लल्ला की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई।
सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा ने बताया कि गढ़ियारंगीन क्षेत्र की वादी की बेटी जलालाबाद क्षेत्र में ब्याही थी। वह कई दिनों से बीमार चल रही थी। वादी अपनी छोटी बेटी (14) के साथ बड़ी बेटी को देखने के लिए उसकी ससुराल गई थी। 24 मई, 2012 की रात करीब 12 बजे गांव का जयराम अपने दो बेटे बाबूराम, सत्यवीर, भाई मनीराम आदि के साथ हथियार लेकर घर में घुस आया। वे लोग उसकी छोटी बेटी को जबरन उठा ले गए।
विरोध करने पर तमंचा तानकर जान से मारने की धमकी दी। तहरीर के आधार पर 28 मई 2012 को बाबूराम, सत्यवीर, जयवीर और मनीराम के खिलाफ जलालाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। आठ जून को पुलिस ने बस अड्डे से किशोरी को बरामद कर लिया। उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। अदालत में पीड़िता ने कलमबंद बयान में अभियुक्त शिवकुमार, धनवीर और बड़े लल्ला को भी घटना में शामिल होना बताया।
न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी बाबूराम, सत्यवीर और शिवकुमार को आईपीसी की धारा 376 में दोषी पाते हुए उन्हें दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। वहीं जयराम, मनीराम और धनवीर को सात-सात वर्ष के कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।