हरिओम त्रिवेदी
पुवायां (शाहजहांपुर)। खुटार के गांव से निकले कुछ युवा सोशल मीडिया पर घूम मचा रहे हैं। ये युवा आम लोगों की समस्याओं को कॉमेडी वीडियो के जरिये स्थानीय भाषा में लोगों तक पहुंचा रहे हैं। खुटार ब्लॉक के गांव चांदपुर निवासी उत्पल वाजपेयी टीईटी, सीटीईटी आदि की परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2017 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लखनऊ चले गए। बाद में मन उचट गया और वह लौट आए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर सक्रिय होने का मन बनाया। वर्ष 2017 में उन्होंने यूपी हंगामा के नाम से यू-ट्यूब चैनल बनाया।
गांव के ही कुछ युवाओं को जोड़कर उन्होंने पहला वीडियो बाप-बेटा के नाम से बनाकर चैनल पर डाला। यूपी हंगामा पर उत्पल और उनकी टोली ने 65 वीडियो डाले। अपेक्षित सफलता न मिलने पर उत्पल और उनके साथियों ने विचार किया। उत्पल के अनुसार वीडियो खड़ी बोली में होने के कारण कम पसंद किए जाते थे। इस कारण उन लोगों ने वीडियो गांव-देहात में बोली जाने वाली भाषा में बनाने की सोची। इसके बाद 26 अगस्त, 2020 को द फनडोज के नाम से नया चैनल बनाया गया। द फनडोज पर सबसे पहले युवा नेता के नाम का वीडियो डाला गया। इस वीडियो में युवाओं के राजनीति में आने की महत्वाकांक्षा और समस्याओं का जिक्र था। इस वीडियो ने चैनल को चर्चा में ला दिया। इसके बाद दर्द-ए-बेरोजगारी, सरकारी कार्यालय, ग्राम पंचायत, गांव की बिजली सहित लगभग 36 वीडियो द फनडोज पर डाले जा चुके हैं। यूट्यूब पर द फनडोज के 1.30 लाख सब्सक्राइबर हैं और फेसबुक पर 1.03 लाख फॉलोअर हैं। संवाद
25 से 30 हजार रुपये प्रति माह कमा रहे
उत्पल अपनी टीम के लिए स्क्रिप्ट लिखते हैं। टीम में उत्पल के भाई पल्लव भी हैं जो डी-फार्मा कर चुके हैं। लखीमपुर के थाना भीरा के गांव धर्मापुर के शोभित मिश्रा, मैलानी के मनु यादव, चांदपुर के विशाल शुक्ल प्रमुख भूमिकाओं में रहते हैं। ये लोग भी बीएससी कर चुके हैं। सहयोगी के रूप में अभिषेक वाजेपयी, आदित्य शुक्ला, ललित राठौर भी काम करते हैं। प्रमुख सदस्यों की कमाई यूट्यूब के माध्यम से 25 से 30 हजार रुपये प्रति माह है। सहयोगियों को भूमिका के अनुसार राशि मिलती है। यू-ट्यूब पर एक लाख सब्सक्राइबर होने पर द फनडोज टीम को बटन भेजा गया था।
हास्य के साथ बात का ज्यादा प्रभाव
उत्पल वाजपेयी का कहना है कि किसी बात को लोगों के दिमाग में रखना है तो हास्य अच्छा माध्यम है। इस कारण उनके वीडियो हंसाते हुए लोगों को राजमर्रा होने वाली समस्याओं से रूबरू कराते हैं। पहले हंसाने के बाद वह लोग मूल मुद्दे पर आते हैं। 15 दिन पहले महंगाई पर वीडियो शेयर किया था।
तानों ने दी नई दिशा
गांवों में जवान बेटे काम नहीं करते हैं तो घर से लेकर बाहर तक के लोग ताना मारते हैं। द फनडोज टीम को भी इससे गुजरना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया। शुरुआत में वीडियो बनाने में आर्थिक समस्या आई तो टीम के सदस्यों ने पॉकेट मनी का इस्तेमाल किया।