शिक्षा के क्षेत्र में दशकों पिछड़ेपन का दंश झेलने वाला जनपद अब नित नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। इसी कड़ी में जिले के तीन महाविद्यालयों में इस बार बीएससी एग्रीकल्चर (बीएससी एजी) की कक्षाएं शुरू हो रही हैं। तीनों महाविद्यालयों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी दो चुके हैं और विश्वविद्यालय से संबद्धता प्रक्रिया भी अंतिम चरण में बताई जा रही है। उम्मीद की जा रही है इसी सत्र से इन कॉलेजों में कृषि आधारित शिक्षण कार्य आरंभ हो जाएगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुवायां क्षेत्र के रतन सिंह मेमोरियल कॉलेज, मिर्जापुर क्षेत्र में धर्मजीत सिंह महाविद्यालय और कलान क्षेत्र में सत्यपाल मेमोरियल कॉलेज में बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम की स्वीकृति मिल चुकी है। विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए एक कॉलेज का निरीक्षण भी हो चुका है, जबकि दो कॉलेजों का निरीक्षण होने वाला है। कृषि आधारित पाठ्यक्रम शुरू होने से ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों की काफी हद तक समस्या का समाधान हो जाएगा। क्योंकि बीएससी एजी अन्य पाठ्यक्रमों के मुकाबले काफी उपयोगी माना जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि इससे खेती में नई तकनीक विकसित करने में छात्रों को मदद मिलेगी, साथ ही उद्यान, मृदा परीक्षण, पर्यावरण विज्ञान, कृषि आधारित शोध कार्य, जैव विविधता, पादप विज्ञान आदि क्षेत्र में युवाओं की जिज्ञासा बढ़ेगी और यह पाठ्यक्रम रोजगारपरक साबित होगा। अभी तक बीएससी एजी किसी महाविद्यालय में नहीं खुल सका था। इसका कारण यह था कि इस पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए 15 बीघा कृषि फार्म होना जरूरी था, जो किसी महाविद्यालय के पास नहीं था, लेकिन अब यह शर्त भी एक नहीं, बल्कि तीन कॉलेज पूरी कर रहे हैं, जिस कारण युवाओं का भला होने वाला है। अभी तक बीएससी एजी के लिए छात्र-छात्राओं को अन्य जनपदों में जाना पड़ता था। अब इस समस्या से भी निजात मिल जाएगी।