करीब चार साल पहले गर्रा नदी के कटान से जिला अस्पताल-चौहनापुर मार्ग कटने से बेपरवाह प्रशासन ने इस बार तब सुध ली जब बारिश का दौर शुरू होने पर कटान से करीब एक किमी मार्ग चलने लायक ही नहीं बचा। सड़क के एक ओर नहर और दूसरी ओर गर्रा नदी से आवागमन की समस्या और भी विकराल हो गई। सड़क किनारे बसे तमाम गांवों के लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। मार्ग को चलने लायक बनाने के लिए सिंचाई विभाग ने ठेके पर दस स्पर बनवाने का निर्णय किया, लेकिन पांच स्पर बनने का कम ठप होने से ग्रामीणों में रोष पनप रहा है। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से बनी थी रोड
जिला अस्पताल के पास से निकली अजीजगंज-भरगवां रोड करीब एक दशक पहले प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाई गई थी। करीब चार मीटर चौड़ा ओर 24 किमी लंबा मार्ग आगे चौहनापुर तक जाता है। शहर से नेशनल हाईवे के बाईपास को क्रॉस करके करीब चार किमी आगे रुद्रपुर गांव पहुंचते ही गर्रा के कटान से रोड को हुआ नुकसान दिखने लगता है। रुद्रपुर के रहने वाले विनोद कुमार के अनुसार वर्ष 2010 में आई भयंकर बाढ़ ने रोड की करीब तीन मीटर चौड़ाई लील ली। चलने के लिए बाकी बचे एक मीटर चौड़े पगडंडी जैसे रोड के एक ओर नहर तो दूसरी तरफ रुद्रपुर की ओर नदी का पानी उफान ले रहा है।
सर्कस के करतब जैसा है खतरनाक रोड से गुजरना
रुद्रपुर से लेकर चौहनापुर तक बाढ़ से इतना कटान हुआ कि कहीं-कहीं रोड की चौड़ाई एक मीटर भी नहीं बची है। ऐसी जगहों से गुजरना सर्कस के करतब जैसा खतरनाक है। ग्रामीणों की मजबूरी है कि शहर को जाने के लिए उनके पास अन्य कोई लिंक रोड नहीं है। मजबूरी में उन्हें रोड के कटे हिस्से में डाली गईं मिट्टी की बोरियों के ऊपर से गुजरना पड़ रहा है।
रोड से जुड़े हैं कांट ब्लॉक के सौ से ज्यादा गांव
अजीजगंज-चौहनापुर रोड के किनारे रुद्रपुर, कारी मकुआपुर, बिजलापुर, सरौरा, बबक्करपुर, चांदापुर, सिसनई आदि लगभग एक सौ गांवों की बसावट है। रोड सही होने पर यात्री ढोने वाली जीपें और अन्य छोटे वाहन धड़ल्ले से गुजरते हैं, लेकिन इन दिनों रोड की हालत देख निजी यात्री वाहन चालक कोई खतरा लेने के मूड में नहीं हैं। सवारियों का साधन घटने से आवागमन में बाधा पड़ने से ग्रामीणों को काफी दिक्कत हो रही है।
इसलिए नाराज हैं आसपास के गांवों के लोग
चार साल पहले बाढ़ से रोड बरबाद होने पर क्षेत्र के ग्रामीणों ने तत्कालीन डीएम और सिंचाई विभाग से मार्ग का पुनर्निर्माण कराने का आग्रह किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों की ओर से बाद में भी जिले के अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन परिणाम शून्य रहा। ग्रामीणों के रोष की चिनगारी तब और भड़क उठी जब सिंचाई विभाग के ठेकेदारों ने रुद्रपुर के पास प्रस्तावित दस स्परों के बजाय केवल पांच पर पत्थर के बजाय मिट्टी की ठोकरें बनाने का काम शुरू कराया।
पानी में डूब गए पांच स्परों के फाउंडेशन बेस
ग्रामीण इस बात से भी खफा हैं कि सड़क को बचाने का काम तब शुरू हुआ जब गर्रा में पानी बढ़ गया। उनकी नाराजगी स्वाभाविक भी है क्योंकि रुद्रपुर के पास केवल स्पर संख्या एक, दो, तीन, पांच और दस पर काम चल रहा है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता चंद्रशेखर गुप्ता के अनुसार रुद्रपुर के पास स्पर संख्या चार, छह, सात, आठ और नौ के पक्के फाउंडेशन बेस पानी में डूबे होने के कारण उन पर काम शुरू कराने के लिए नदी में पानी घटने का इंतजार हो रहा है।
चौहनापुर के पास सात स्पर बनने प्रस्तावित
एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव ने सिंचाई विभाग के एक्सईएन सीएस गुप्ता के साथ बृहस्पतिवार को रुद्रपुर जाकर स्पर बनाने के काम का जायजा लिया। वहां से लौटकर एडीएम श्रीवास्तव ने बताया कि रुद्रपुर के पास इतना काम करा लिया गया है कि नदी चढ़ने पर शेष बची रोड को नुकसान नहीं होगा। एडीएम के अनुसार चौहनापुर को बाढ़ से बचाने के लिए वहां भी सात स्पर बनवाने का काम जल्दी शुरू कराया जाएगा।