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सीमेंट फैक्टरी समेत अन्य उद्योगों का तेजी से बढ़े काम, प्रशासन कर रहा तैयारी

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शाहजहांपुर। लखनऊ में आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में जिले में करीब 15 सौ करोड़ के निवेश की राह प्रशस्त हुई है। आदित्य बिरला ग्रुप की ओर से सीमेंट फैक्टरी लगाने की सौगात से जिले में बड़े पैमाने में लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद बढ़ी है। प्रशासन भी उद्योग लगाने में कोई अड़चन न आए, इसके प्रयास कर रहा है।
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ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में सीमेंट फैक्टरी समेत अन्य औद्योगिक इकाइयों की घोषणा के बाद प्रशासन भी तैयार है। शाहजहांपुर से सात उद्यमियों ने उद्योग लगाने के प्रस्ताव दिए हैं। औद्योगिक इकाइयों की राह में आने वाली बाधाओं को दूर कराकर जल्द से जल्द धरातल में लाने की तैयारी है। स्थानीय प्रशासन के साथ ही शासन भी उद्योगपतियों के लिए लचीला रुख अपना रहा है, ताकि उद्योग लगाने में बेवजह की अड़चन न पैदा हो। इसके लिए अलग-अलग विभाग मिलकर तैयारी करेंगे। सीमेंट फैक्टरी 600 से एक हजार करोड़ के बीच की लागत में बनकर तैयार होगी।
बताया जा रहा है कि सीमेंट फैक्टरी लखनऊ से शाहजहांपुर के बीच प्रस्तावित थी, मगर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयास से जिले को यह सौगात मिल सकती है। उद्योग उपायुक्त दुर्गेश कुमार ने बताया कि जिले में सीमेंट फैक्टरी को लेकर सूचना मिल गई है। यह कहां पर लगेगी, इसके लिए अभी प्लान बनाया जा रहा। उद्यमियों से अपील है कि इधर-उधर दफ्तरों में जाने से बचें और निवेश मित्र पोर्टल पर अपना लॉग-इन बनाकर क्रमबद्ध तरीके से काम करें। पोर्टल पर आवेदन करने पर तुरंत एनओसी प्राप्त हो जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि बिजली का कनेक्शन, धारा 147 व अन्य सुविधाएं भी पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
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यातायात के लिहाज से रोजा मुफीद
आदित्य बिरला ग्रुप के जिले में सीमेंट फैक्टरी लगाए जाने की घोषणा के बाद सबसे बड़ी बाधा जमीन के चयन को लेकर सामने आएगी। फैक्टरी के लिए ऐसा स्थान चयनित किया जाएगा, जहां से यातायात के संसाधन आसानी से मुहैया हों। रेलवे और हाईवे से जुड़ाव की जरूरत है। लखनऊ-दिल्ली हाईवे के किनारे होने के कारण रोजा क्षेत्र पहली पसंद बन सकता है।
यहां से रेलवे लाइन भी फैक्टरी तक बिछाई जा सकती है जिस तरह से रिलायंस थर्मल पावर तक बिछी हुई है। सीमेंट बनाने के लिए जरूरी फ्लाई ऐश भी थर्मल पॉवर में आसानी से उपलब्ध है। अगर यहां पर किसानों की जमीन का अधिग्रहण करना पड़ा तो यह काम तेजी से निपटाया जाएगा। वहीं वन क्षेत्र की जमीन लेने पर पर्यावरण आदि से संबंधित जटिलताओं को सुलझाने में प्रशासन मदद करेगा।
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