फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईस्कूल की परीक्षा में नंबर कम आने पर छात्रा ने फंदे से लटककर दी जान

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। जैतीपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी हाईस्कूल की छात्रा ने शुक्रवार सुबह कमरे में फंदे से लटककर जान दे दी। परीक्षा परिणाम में नंबर कम आने पर पांच दिन से वह गुमसुम थी और आत्मघाती कदम उठा लिया। बेटी की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
विज्ञापन

खेतीबाड़ी करने वाले किसान के चार बेटे-बेटियां है। तीसरे नंबर की बेटी ने इस वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। परिजन के मुताबिक वह मीरानपुर कटरा क्षेत्र के स्कूल में संस्थागत छात्रा थी। बोर्ड परीक्षा के चलते उसने खूब मेहनत की थी लेकिन परिणाम जारी होने पर उसके अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं आए थे। पोस्टमार्टम हाउस में भाई ने बताया कि परीक्षा में अच्छे अंक नहीं आने से बहन काफी उदास थी। अगले साल मेहनत कर पास होने के लिए समझाया भी था। शुक्रवार सुबह पांच बजे परिवार के सभी सदस्य उठ गए। पिता खेत पर चले गए। उसकी मां, छोटी बहनघर के काम में लग गए। वह भी घर के बाहर थे। बहन कमरे में लेटी थी। उसने कमरे में साड़ी को फंदा बनाकर कुंडे में डालकर लटककर अपनी जान दे दी। उनकी पत्नी कमरे के अंदर गई तो बहन का शव लटका देखकर चीख पड़ीं। कुछ देर में ग्रामीणों की भीड़ लग गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
उदास बहन का मन को बहलाने को शादी में ले गया था भाई
-18 जून को आए रिजल्ट में अच्छे अंक न आने से छात्रा काफी उदास थी। परिजन ने उसे काफी समझाया पर उसकी मायूसी को दूर न कर सके। भाई ने बताया कि वह 21 जून को बहन का मन बहलाने के लिए रिश्तेदार की शादी में लेकर गया था। वहां भी बहन किसी से ज्यादा नहीं बोली। वह शादी का कार्यक्रम निपटने से पहले ही पापा के साथ चली आई थी।
विज्ञापन

सभी विषयों में 50 से ऊपर थे नंबर
-परीक्षा परिणाम में सभी विषयों में छात्रा के नंबर 50 से ऊपर थे। उसने हिंदी में 53, अंग्रेजी में 56, होमसाइंस में 59, साइंस में 53, सोशल साइंस में 53, आर्ट में 73 अंक पाए हैं, पर वह अपने अंकों से संतुष्ट नहीं थीं।
विद्याथियों पर न डालें दबाव
राजकीय मेडिकल कॉलेज के क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. रोहिताश ईशा ने बताया कि विद्यार्थियों पर पड़ने वाला तीन तरह का दबाव उन्हें आत्महत्या की तरफ ले जा रहा है। अगर सफल नहीं हुए तो मित्र मंडली क्या कहेगी, अभिभावक क्या सोचेंगे और कॅरियर तो बीच में ही रह गया। इन बातों से पैदा होने वाला तनाव रोज औसतन 26 विद्यार्थियों की जान ले रहा है। अधिकांश राज्यों में ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं। साल 2016 की बात करें तो 9,474 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद भी यह संख्या कम नहीं हुई है। बोर्ड परीक्षा का भय और पाठ्यक्रम का बोझ भी इसका कारण है। एक बड़ा कारण परीक्षा में असफल होना या अपेक्षित अंक प्रतिशत प्राप्त न कर पाना भी है।
विज्ञापन

अभिभावक इन बातों का रखें ख्याल
-अपने बच्चो के लगातार संपर्क में रहें।
-उन्हें हर तरीके से प्रोत्साहन दें।
-दबाव या अवसाद में होने का कोई भी लक्षण दिखे तो बिना कोई देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।
-ऐसे मामलों में बच्चे की काउंसलिंग कराने में संकोच न करें।
-आत्महत्या के साधनों जैसे कीटनाशक, अग्नेयास्त्र, दवाइयों तक बच्चों की पहुंच को कम करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें