साठा धान की नर्सरी को जुतवाकर नष्ट कराने गए नायब तहसीलदार और पुलिस को किसानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। नारेबाजी और हंगामे के चलते साठा की नर्सरी नष्ट नहीं की जा सकी। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम को लौटना पड़ा।
साठा धान को लेकर बवाल बढ़ने लगा है। भाकियू सहित तमाम किसान साठा धान लगाने का विरोध कर रहे हैं तो तमाम किसान साठा धान लगाने को अपने हित में बताते हुए धान लगाने की तैयारी कर चुके हैं। डीएम ने आदेश दिए थे कि साठा धान की नर्सरी को जुतवा दिया जाए। एसडीएम रामशंकर ने भी पुलिस को साठा धान की नर्सरी नष्ट कराने के निर्देश दिए थे। बृहस्पतिवार को नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र कुमार पुवायां के कोतवाली प्रभारी अशोक पाल के साथ फोर्स लेकर गुटैया क्षेत्र में पहुंचे और साठा धान की नर्सरी जुतवाने का प्रयास किया। सूचना पाकर क्षेत्र के तमाम किसान मौके पर जमा हो गए। उन्होंने पुलिस, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। किसानों ने कहा कि वे साठा धान जरूर लगाएंगे। नायब तहसीलदार ने किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन किसान उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हुए। विरोध बढ़ते देख टीम लौट गई। एसडीएम रामशंकर ने बताया कि मामले की रिपोर्ट डीएम को भेजी जा रही है।
किसानों ने दी जाम लगाने की धमकी-किसानों ने साठा धान की नर्सरी नष्ट कराने पर जाम लगाने की चेतावनी दी है। किसानों ने इस बाबत डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है। ज्ञापन में किसानों ने कहा है कि क्षेत्र की एक चीनी मिल गन्ने का रकबा बढ़ाना चाहती है। इस कारण कुछ अराजक तत्वों से मिलकर किसानों के खिलाफ कुचक्र रचा जा रहा है। किसानों की आलू और मटर की फसल नष्ट हो गई। बची फसल का सही रेट नहीं मिल सका। अब साठा धान की नर्सरी पर काफी खर्चा हो चुका है। प्रशासन अब नर्सरी नष्ट करने की बात कह रहा है। यह कार्रवाई केवल पुवायां तहसील में ही की जा रही है। अन्य जगहों पर साठा लग रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि साठा धान की पौध को नष्ट किया गया तो 24 फरवरी को पलिया-शाहजहांपुर हाईवे पर गुटैया के पास जाम लगाया जाएगा। ज्ञापन पर अमरीक सिंह, जसविंदर सिंह, रामपाल यादव, जसपाल सिंह, चरनजीत सिंह, कुलदीप सिंह, नेतराम, चेतराम, निशान सिंह, लखविंदर सिंह, सतनाम सिंह, गुरमीत सिंह, अमर सिंह, पर्वत सिंह, फकीरेलाल आदि ने हस्ताक्षर किए हैं।