शाहजहांपुर। भंडेरी गांव के 20 से अधिक लोग हापुड़ की पटाखा फैक्टरी में काम करते थे। अधिकतर लोग बेरोजगारी से निजात पाने के लिए गांव के अमित के साथ दस हजार रुपये मासिक वेतन की आस में हापुड़ गए थे। उन्हें फैक्टरी में नौकरी मिल भी गई, लेकिन एक हादसे में दस लोगों की मौत ने परिजन को जिंदगी भर का जख्म दे दिया।
हादसे के बाद यहां से गए परिजन को अपनों को तलाश करने में काफी मशक्कत करना पड़ी। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया था। किसी तरह अपनों तक पहुंच पाए। दूसरी तरफ मृतकों के शव भी बमुश्किल पहचान में आए। अधिकतर शव जलने के कारण पहचान में नहीं आ रहे थे। पूर्व प्रधान अली हसन ने बताया कि रविवार शाम को मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम करा दिया गया। सभी शवों को एक साथ मिनी ट्रक के जरिये लाया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर लोग अलग-अलग निजी वाहन से शव लाने में असमर्थ हैं। इसलिए परिजन ने मिनी ट्रक बुक कर दिया। माना जा रहा है कि सोमवार सुबह शव गांव आ जाएंगे।
गांव में सिर्फ सात लोग नौकरी पेशा
भंडेरी गांव में अधिकतर लोग नौकरीपेशा है। मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार को पाल रहे हैं। कई परिवारों के पास खेती तक नहीं है। कई के पास मात्र एक से दो बीघा खेत है। पूर्व प्रधान अली हसन बताते हैं कि पांच हजार की आबादी वाले गांव में मात्र सात लोग ही सरकारी नौकरी करते हैं।
दूध और पेप्सी बनाने की बताई थी फैक्टरी
मृतकों के परिजन ने बताया कि ठेकेदार उन्हें दूध और पेप्सी बनाने की फैक्टरी में काम कराने की बात कहकर ले गया था। उन्हें नहीं बताया था कि फैक्टरी में पटाखे बनाए जाते हैं। बेरोजगारी का दंश झेलने वाले युवक और अन्य दस हजार रुपये मासिक वेतन की बात पर चले गए थे। फैक्टरी में रहने और खाने के लिए अलग से जगह दी गई थी।
पांच दिन पहले ही लौट आया था सुरजीत
गांव का सुरजीत भी हापुड़ की फैक्टरी में काम करता था। पांच दिन पहले ही उसे बुखार आ गया। दवा लेने के बाद भी बुखार न उतरने पर वह गांव लौट आया। उसका भाई प्रदीप हापुड़ की फैक्टरी में काम कर रहा था। परिवार के लोग हादसे से दुखी हैं, लेकिन सुरजीत के लौट आने पर राहत है।
फैक्टरी के सुरक्षाकर्मी रखते थे नजर
फैक्टरी के सुरक्षा कर्मियों ने काफी सख्त नियम बना रखे थे। मालिक भी बराबर अपने मजदूरों पर नजर रखता था। वह काफी सख्ती बरतता था। सुरजीत बताते हैं कि किसी भी मजदूर को अकेले फैक्टरी से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था। एक बार सभी मजदूरों की सब्जी एक मजदूर को भेजकर मंगाई जाती थी। फैक्टरी मालिक बाहर के किसी भी व्यक्ति से दोस्ती करने के लिए रोकता था।
इरफान का शव हापुड़ में होगा सुपुर्द-ए-खाक
पूर्व प्रधान ने बताया कि इब्बन के पुत्र इरफान का शव गांव नहीं लाया जाएगा। परिजन हापुड़ पहुंच गए हैं। इरफान के भाई वहीं पर काम करते हैं। इसलिए, वह वहीं पर शव को सुपुर्द-ए-खाक कर देंगे।
वित्तमंत्री ने जताया अफसोस
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने हापुड़ हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि घटना में जान गंवाने वाले सभी मजदूरों के परिवारों के साथ उनकी गहरी संवेदना है। घटना की जांच कराई जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
फोटो: 05 एसपीएनपी 30
मृतकों के आश्रितों को हापुड़ प्रशासन देगा आर्थिक सहायता
शाहजहांपुर। हापुड़ विस्फोट में जान गंवाने वालों के आश्रितों को सांत्वना देने के लिए एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी रविवार को सीओ सदर अखंड प्रताप सिंह व अन्य अधिकारियों के साथ भंडेरी गांव पहुंचे। उन्होंने मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से लकड़ी की व्यवस्था कराई। साथ ही दुखी परिवारों के भोजन की व्यवस्था के लिए आटा, दाल, चावल, आलू आदि रसद का प्रबंध कराया।
एडीएम ने बताया कि सभी मृतकों के आश्रितों को आर्थिक सहायता हापुड़ जिला प्रशासन के स्तर से सुलभ कराई जाएगी। भविष्य में पीड़ित परिवारों को स्थानीय प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद दिलाई जाएगी। एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी ने बताया कि वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने हापुड़ के डीएम से बात की है। उन्होंने बताया कि वहां के जिला प्रशासन ने शासन को मृतक परिवारों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक सहायता देने की शासन को संस्तुति भेजी है। एडीएम के अनुसार तहसीलदार को सभी मृतक आश्रितों के बैंक खाता नंबर जुटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि शासन से मिलने वाली धनराशि उन्हें तत्काल उपलब्ध कराई जा सके। संवाद