जियाखेल में पकड़ा जा चुका बारूद का जखीरा
कांट में हुए हादसे के बाद न सिर्फ दिवाली पर आतिशबाजी बाजार शहर से बाहर लगने लगे, प्रशासन की सख्ती से कई लाइसेंसी आतिशबाजों ने अपने कारोबार बदल दिए। इसके बावजूद कुछ आतिशबाज चोरी-छिपे महानगर में आतिशबाजी बनाने में जुटे रहे। पांच वर्ष पहले प्रशासन को मिली एक सूचना के आधार पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने मोहल्ला जियाखेल के एक मकान पर छापा मारा तो छत पर कई लोग गंधक-पोटाश से आतिशबाजी के आइटम बनाते मिल गए। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में बारूद समेत बने-अधबने पटाखे भी बरामद किए थे। लोगों का मानना है कि पुलिस ईमानदारी से सुरागरसी करे तो महानगर में बारूद के ऐसे अन्य कई ठिकाने पकड़े जा सकते हैं।
मौत से अस्पतालों में संघर्ष कर रहे 18 घायल
पटाखा फैक्टरी में हादसे के बाद 10 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों अधिकतर 19 से 25 वर्ष तक के थे। हादसे में झुलसे 18 लोग अस्पताल में मौत से संघर्ष कर रहे हैं। चांद मियां पुत्र मीना, यूसुफ पुत्र लकीर, उसके बच्चे नीशू और साहिल, बबलू, उसके बेटै अहिरा व जुनेरा, मुस्तकीम, उसका बेटा और बेटी, बिटिया पुत्री बादशाह, चांद तारा पुत्री बादशाह, सोनू, अंकुश और प्रदीप की हालत गंभीर बनी है। इन्हें हापुड़ के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। हादसे की सूचना के बाद पहुंचे परिजन को घायलों की पहचान करने में काफी मशक्कत करना पड़ी। कुछ बेहोश थे, जब वह होश में आए तो अपनों को देखकर उनके आंसू छलछला आए।
जिले में आतिशबाजी की थोक बिक्री के सात-आठ लाइसेंस जारी हुए हैं, लेकिन जन सुरक्षा के लिहाज से उनके गोदाम शहर से बाहर स्थापित हैं। सभी थोक विक्रेता अपनी दुकानें शहर के अंदर अबादी क्षेत्र से हटाकर बाहर ले जा चुके हैं। समय-समय पर उनके गोदामों का निरीक्षण कर स्टॉक की जांच भी की जाती है। हापुड़ की घटना का संज्ञान लेते हुए आतिशबाजी गोदामों का निरीक्षण किया जाएगा। -देवेंद्र प्रताप सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट