जलालाबाद। गंगा-रामगंगा में बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को बचाव एवं राहत कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया। फ्लड मॉक ड्रिल के तहत कोला गांव के सरकारी स्कूल से लेकर कोलाघाट तक चली कवायद में बाढ़ से बचाव की तैयारियां परखी गईं।
गांव कोला के सरकारी स्कूल में स्थापित की गई बाढ़ चौकी पर एकत्रित हुए विभिन्न विभागों के कर्मचारी कोलाघाट के रामगंगा तट पर पहुंचे। डूबते व्यक्ति को रेस्क्यू करने के अभ्यास के दौरान नदी में घुसे गांव कसारी निवासी वीरू जब डूबने लगे तभी एनडीआरएफ का जवान उन्हें बचाने को नदी में उतरा और किनारे खींच लाया। वहां मौजूद डॉक्टर ने वीरू का चेकअप किया और स्ट्रेचर के जरिये एंबुलेंस से बाढ़ चौकी लाकर उपचार किया गया।
बाद में वीरू के स्वस्थ होने पर उसे शासन से निर्धारित राशन वाली किट देकर वापस गांव भेज दिया गया। तहसीलदार चमन सिंह ने बताया कि बाढ़ के दौरान किसी डूबते व्यक्ति को बचाने, गांव को खाली कराने या प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने जैसे कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया। इस मौके पर आपदा विशेषज्ञ अभिषेक श्रीवास्तव, आपदा राहत पटल प्रभारी संजीव सक्सेना, यात्री कर अधिकारी, एचएल वर्मा समेत पुलिस, ब्लॉक, राजस्व, स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सालय समेत तहसील स्तरीय कर्मचारी व कोला के प्रधान विमलेश मौजूद रहे।
नहीं पहुंची एनडीआरएफ की टीम
एनडीआरएफ की टीम न आने पर डूबने वाले वीरू को बचाने के लिए नदी में उतरे कसारी गांव के ही छोटे लाल को सुरक्षा किट पहनाकर एनडीआरएफ के जवान का रूप दिया गया। बाद में इन दोनों को तहसीलदार ने राशन किट प्रदान की। किट में 16 तरह की विभिन्न सामग्री रखी गईं जिससे परिवार का भोजन तैयार किया जा सके। तहसीलदार ने बताया कि आज प्रदेश के 40 जिलों में एक साथ मॉकड्रिल हुई, जिसके चलते एनडीआरएफ की टीम अति संवेदनशील स्थानों तक ही पहुंच सकी। तहसीलदार चमन सिंह ने बताया कि राहत पहुंचाने के लिए पांच स्थानों पर नाव व मोटर बोट का संचालन किया जाएगा।