शाहजहांपुर। आजीवन कारावास की सजा पाने वाले संजय उर्फ संजू ने साथी सत्येंद्र के साथ बहन की संपत्ति के लिए कार में ही मां-बेटी मिथलेश और सुनीता की गला काटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव सिंधौली भंडेरी गांव के पास नहर के पास फेंक दी थी।
शासकीय अधिवक्ता श्रीपाल वर्मा ने बताया कि पीलीभीत के बिलसंडा के गांव बमरौली निवासी कमलाशंकर की शादी वारदात से सात-आठ साल पहले निगोही थाना क्षेत्र के गुरगवां गांव की सुधा से हुई थी। कमलाशंकर संपन्न परिवार से थे। दोनों के बच्चे न होने पर सुधा के परिवार ने ही कमलाशंकर को दूसरी शादी करने का सुझाव दिया था। सुधा के भाई कमलेश ने अपनी रिश्तेदार खीरी के फरधान थाना क्षेत्र के गांव सैदपुर के रहने वाले सतीश चंद्र मिश्रा की बेटी सुनीता से कमलाशंकर की शादी तय कर दी। कमलाशंकर ने अपने साले सुभाष की बेटी प्राची को गोद ले रखा था। शादी के वक्त सुनीता से यह बात छिपाई गई। शादी के बाद जब सुनीता को जब यह बात पता चली तो उसने एतराज जताया। यहीं से सुधा और सुनीता के बीच विवाद होने लगा।
सुनीता अपने मायके जाकर रहने लगी। बाद में उसे समझाकर वापस ससुराल लाया गया। सुधा के भाई संजय उर्फ संजू को यह लगने लगा था कि सुनीता से होने वाली संतान कमलाशंकर की संपत्ति का वारिस होगी। संजू शाहजहांपुर के एक व्यक्ति की कार किराये पर चलाता था।
2010 में हुई वारदात के वक्त सुनीता अपने मायके में थी। संजू ने अपने कार मालिक से कहा कि उसे सीतापुर की एक बुकिंग मिली है। कार लेकर वह अपने साथी सत्येंद्र यादव के साथ सुनीता के घर पहुंचा। उससे नैमिषारण्य तीर्थ घुमाने की बात की लेकिन पिता सतीश ने मना कर दिया। सतीश के खेत पर जाने के बाद संजू ने फिर से घुुमा लाने की बात कही तो मां मिथलेश को शक हुआ। उसने भी बेटी की सुरक्षा के लिए साथ चलने की बात कही।
इस पर संजू और सत्येंद्र दोनों को कार से लेकर निकले। रास्ते में कार में ही दोनों की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी और दोनों की लाशें फेंक दीं। वारदात के बाद पुलिस ने संजू और सत्येंद्र को गिरफ्तार कर लिया था। सत्येंद्र बाद में जमानत पर बाहर आ गया था, जबकि संजू जेल में ही रहा। संजू को केस लड़ने के लिए वकील भी नहीं मिल रहे थे। बाद में न्यायमित्र अधिवक्ता बृजेशचंद्र मिश्रा ने संजू की पैरवी की। अदालत के फैसले के वक्त केवल संजू की पत्नी मौजूद थी।