फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shahjahanpur News: खतरनाक हुई हवा... 500 तक पहुंचा एक्यूआई

विज्ञापन
डॉ. आलोक सिंह, रसायन विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज। स्रोत : स्वयं
विज्ञापन
शाहजहांपुर। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच शाहजहांपुर से भी चिंतित कर देने वाली खबर आई है। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सोमवार सुबह खतरनाक स्तर 500 पर पहुंच गया। हालांकि दोपहर में 280 के आसपास रहा। यह भी खराब श्रेणी में माना जाता है।
विज्ञापन


खास बात यह है कि इतना एक्यूआई तो दिवाली पर पूरी रात हुई आतिशबाजी के बाद भी नहीं पहुंचा था। दिवाली की अगली सुबह एक्यूआई 244 दर्ज किया गया था। माना जा रहा कि पराली जलाने, क्रशर मशीनों के चलने और पेराई सत्र शुरू होने से ऐसा हुआ है। जिले में पराली जलाने की अब तक 99 घटनाएं पंजीकृत हो चुकी हैं। पराली जलाने में जिला प्रदेश में तीसरे स्थान पर है।

एसएस कॉलेज के रसायन विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने चाैक क्षेत्र में सुबह और दोपहर को एक्यूआई नापा तो खराब स्थिति में मिला। उनके मुताबिक गंगा के पास के मैदानी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कारक प्रदूषकों की उपस्थिति है। इसके बाद मौसम और स्थानीय परिस्थितियां आती हैं।
विज्ञापन




पराली जलाने के दो और मामने आए सामने

सोमवार को तिलहर और पुवायां में पराली जलाने का एक-एक मामला सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार को जांच के बाद पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



निर्माण और वाहनों का प्रदूषण भी जिम्मेदार

हालांकि केवल पराली जलाने की घटनाएं ही हवा प्रदूषित नहीं करती हैं। आईआईटी कानपुर के अध्ययन के हवाले से डाॅ. आलोक सिंह ने बताया कि सर्दियों में पर्टिकुलर मैटर में 17-26 प्रतिशत की वृद्धि बायोमास के जलने के कारण होती है। आम तौर पर अक्तूबर के बाद बारिश न होने के कारण शुष्क ठंड का मौसम होता है। इससे धूलकणों की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्मॉग या धुंध के रूप में प्रदूषकों का मोटा परत बना लेता है। सर्दियों में प्रदूषण का दूसरा सबसे बड़ा कारण वाहनों का प्रदूषण है। निर्माण और खनन से जुड़ीं गतिविधियां भी हवा प्रदूषित करतीं हैं।

-

एक्यूआई
वायु गुणवत्ता

0-50
अच्छा

51-100
संतोषजनक

101-200
मध्यम गुणवत्ता

201-300
खराब

301-400
खतरनाक

401-500
गंभीर श्रेणी

-

प्रदूषित हवा में सुबह और शाम के वक्त विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन को खनन, निर्माण तथा पराली जलाने की घटनाओं पर सख्ती करनी चाहिए।

-डॉ. आलोक सिंह, रसायन विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज

-

सुबह की सैर करने वालों, सांस और हृदय के रोगियों के लिए प्रदूषित हवा खतरनाक है। बेहतर होगा कि ऐसे मौसम में सुबह की सैर करने से बचें। खासतौर पर वृद्ध और बीमार लोग इस दौरान घर से निकलने से परहेज करें। कुछ दिनों में स्थिति सामान्य होने पर अपनी दिनचर्या को नियमित कर लें।
विज्ञापन


- डॉ. केसी वर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज

-

पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। अब दोगुना जुर्माना वसूल किया जाएगा। अब तक पराली जलाने की 99 घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

- धीरेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक

डॉ. आलोक सिंह, रसायन विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज। स्रोत : स्वयं

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें