शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति गरिमा सिंह ने दुष्कर्म के मुकदमे में एक दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसी मुकदमे के एक आरोपी की पत्रावली अलग कर दी गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 18 मार्च 2002 को एक महिला ने तिलहर थाने में तहरीर दी थी कि 17 मार्च को वह अपने खेत में थी। छोटे सिंह और पुजारी सिंह ने उसे पकड़ लिया। शोर मचाने की कोशिश की तो मुंह दबा दिया। दोनों लोगों ने उससे दुष्कर्म किया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। पुजारी सिंह के लगातार अनुपस्थित रहने के कारण 27 सितंबर 2022 को उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर छोटे सिंह को दोषी पाया गया। उसे दस वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया गया। उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।