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रोजा चीनी मिल में हवन-पूजन के साथ शुरू हुआ नया पेराई सत्र

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शाहजहांपुर में बुधवार को रोजा चीनी मिल के केन कैरियर में गन्ना डालकर नए पेराई सत्र का शुभारंभ करत - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर/ रौसर कोठी। अवध शुगर वर्क्स (रोजा चीनी मिल) में नया पेराई सत्र बुधवार को शुरू हो गया। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने केन कैरियर में गन्ने डालकर पेराई सत्र का शुभारंभ किया। इस मौके पर सबसे पहले बैलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली में गन्ने लादकर पहुंचे किसानों को पगड़ी बांधकर और उपहार देकर सम्मानित किया गया।
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पेराई सत्र शुरू होने से पहले मिल परिसर में हवन-पूजन किया गया। इस मौके पर डीएम इंद्र विक्रम सिंह, एसपी एस आनंद, जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव, गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. ज्योत्स्नेंद्र सिंह, गन्ना किसान संस्थान के सहायक निदेशक पीके कपिल, चीनी मिल के अधिशासी उपाध्यक्ष बृजेश शर्मा, महाप्रबंधक मुनेश पाल सिंह आदि ने केन कैरियर में गन्ने डालकर पेराई कार्य शुरू कराया।
ट्राली में गन्ने लेकर पहली ट्रॉली लेकर पहुंचे रामापुर बरकतपुर निवासी किसान सुरेंद्र सिंह और संतराम को पगड़ी बांधकर और फूलमाला पहनाकर सम्मानित किया। साथ ही कंबल, मिठाई और धनराशि भेंट की गई। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि मिल प्रतिदिन 48000 क्विंटल गन्ने की पेराई करेगी। किसानों को चीनी मिल में बैठने, स्वच्छ पेयजल, कैंटीन और रात में सर्दी से बचाव को अलाव आदि की व्यवस्था रहेगी।
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उन्होंने बताया कि तिलहर, पुवायां एवं मकसूदापुर मिल में अगले सप्ताह से पेराई कार्य आरंभ हो जाएगा। इस दौरान ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक सुनील कनौजिया, अशोक मित्तल, केडी सिंह, भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष श्याम बाबू दीक्षित, सर्वेश मिश्रा, अजीत सिंह, भावलखेड़ा के ब्लॉक प्रमुख राजाराम आदि मौजूद रहे।
केन यार्ड की क्षमता बढ़ाई
रौसर कोठी। रोजा चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू होते ही हरदोई चौराहे पर गन्ने से लदी बैलगाड़ियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लगने से लखनऊ-दिल्ली और पलिया-लखनऊ नेशनल हाईवे जाम लग जाता था। इसको देखते हुए मिल प्रबंधन ने इस साल गन्ने लदी ट्रॉलियां खड़ी करने के लिए केन यार्ड की क्षमता बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई है। अधिशासी उपाध्यक्ष बृजेश शर्मा के अनुसार केन यार्ड में पहले 150 ट्रॉलियां खड़ी हो पाती थीं,
वहीं अब 300 ट्रॉलियां खड़ी करने की व्यवस्था की गई है। मिल को रोजाना लगभग 50 हजार क्विंटल गन्ने की आपूर्ति होती है, जबकि पर्चियां लगभग 45 हजार क्विंटल की काटी जाती हैं। ट्रॉलियों को टोकन नंबर से तौला जाता है और एक घंटे में लगभग 20 ट्रॉलियां तौली जाती है। अब जाम लगने की आशंका कम है। संवाद
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