ग्रहण के अद्भुत खगोलीय घटना का रविवार को तमाम लोग साक्षी बने। हालांकि, ग्रहण से जुड़ीं धार्मिक मान्यताओं के कारण मंदिरों के कपाट सुबह से लेकर मोक्ष काल के बाद तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे। ग्रहण के कारण तमाम लोग घरों के रहे। सड़कों पर दोपहर बाद तक सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि, वैज्ञानिक संस्था रिसर्च के अंटा स्थित कार्यालय पर जमा हुए तमाम लोगों ने वैज्ञानिक विधि से सोलर चश्मों के जरिए ग्रहण का नजारा लिया।
सूर्य ग्रहण का आरंभ सुबह 10.25 बजे हुआ। दोपहर 12.09 बजे अपने चरम पर पहुंचा तो दोपहर के वक्त शाम जैसा नजारा हो गया। दोपहर 1.55 बजे ग्रहण समाप्त हुआ। ग्रहण की शुरुआत के दौरान आसमान बादलों से घिरा होने के कारण उसे देखने के इच्छुक लोगों में थोड़ी मायूसी छाई, लेकिन बादल छंटने के बाद ग्रहण को लेकर लोगों का कौतूहल रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक दुर्लभ प्रकार का वलयकार अर्थात कुंडलाकार सूर्य ग्रहण था, लेकिन जनपद में आंशिक सूर्य ग्रहण ही नजर आया क्योंकि यह क्षेत्र वलयकार सूर्य ग्रहण की बेल्ट में नहीं था। इधर, ग्रहण देखने के लिए बड़ी संख्या में बच्चे सुबह से वैज्ञानिक संस्था रिसर्च के अन्टा स्थित कार्यालय पर जमा होने लगे। उन्होंने रिसर्च के निदेशक डॉ. इरफान ह्यूमन की ओर से उपलब्ध कराए गए सोलर चश्मों के माध्यम से ग्रहण का आनंद लिया। सूर्य को कटा हुआ देखकर बच्चों के चेहरे खिलने के साथ उनके मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे। डॉ. ह्यूमन ने उनकी जिज्ञासा शांत करते हुए बताया कि यह एक खगोलीय घटना है जो पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा के आने से घटित होती है। इस अवसर पर तमाम लोगों ने मायलर फिल्टर चश्मों के अलावा पिनहोल कैमरे और एक्लिप्स व्यूअर और एक्सरे फिल्म की कई परतें लगाकर ग्रहण को देखा। ग्रहण देखने में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं।
सुबह से टीवी के आगे बैठ गए लोग
तिलहर। सूर्यग्रहण को लेकर लोगों में खासी उत्सुकता रही। लोग सुबह दस बजे से टीवी खोल कर ग्रहण का नजारा देखने लगे। तमाम लोगों ने मकानों की छतों पर पहुंचकर काला चश्मा और एक्सरे फिल्मों से ग्रहण का दीदार किया। इस खगोलीय घटनाक्रम को देखने के लिए युवाओं में खासा उत्साह रहा। तमाम लोगों ने ग्रहण काल में भोजन नहीं किया और घरों से बाहर भी नहीं निकले। ग्रहण पूरा होने के बाद घरों पर लोगों ने साफ सफाई की। कई लोगों ने थाल में पानी भरकर ग्रहण देखा। खुदागंज में भी तमाम लोगों ने जरूरी सावधानियां बरतते हुए ग्रहण देखा। इस दौरान वह सभी लोग घरों के अंदर रहे, जिन्हें आंखों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं ने घेर रखा है।
रविवार को रहा सबसे बड़ा दिन
सूर्यग्रहण का गवाह बना रविवार वर्ष का सबसे बड़ा दिन साबित हुआ। पर्यावरण विज्ञानी डॉ. विकास खुराना के अनुसार आज 13 घंटे 54 मिनट का दिन रहा और दोपहर में कुछ पल ऐसा समय भी आया जब सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर आ जाने से परछाई मिट जाती है। उन्होंने बताया कि सोमवार से दिन में रोजाना कम से कम एक सेकेंड की कमी आने लगेगी और यह सिलसिला 22 दिसंबर तक चलेगा। तब आज की तुलना में दिन 3.30 घंटे कम हो जाएगा।