शाहजहांपुर। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के वर्ष 2004-05 के फर्जी बीएड अंकपत्रों के आधार पर परिषदीय शिक्षक बनने वाले छह शिक्षकों की बर्खास्तगी कर दी र्गई है। इनके अलावा अभी ऐसे ही 12 अन्य शिक्षक और हैं, जिनके अंकपत्रों की सत्यापन रिपोर्ट आनी बाकी है। फिलहाल इन 12 शिक्षकों का वेतन रोका गया है।
बता दें कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के वर्ष 2004-05 के फर्जी और छेड़छाड़ वाले बीएड अंकपत्रों के आधार पर प्रदेश में हजारों शिक्षकों ने परिषदीय स्कूलों शिक्षक पद पर नौकरी हासिल कर ली थी। इसकी जानकारी मिलने पर विभाग ने तत्काल कार्यवाही करते हुए शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया था, इस लिस्ट में जिले में भी 18 लोगों की तैनाती हुई थी, जिनको 22 जून 2019 को बर्खास्त कर दिया गया था। इस पर कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर अपने को सही बताया था, जिस पर कोर्ट ने बर्खास्तगी पर रोक लगा दी थी और यह शिक्षक इसके बाद फिर नौकरी करने लगे थे। इसके लिए बाकायदा इन्हें वेतन का भुगतान भी किया गया।
हाईकोर्ट से रोक लगने के बाद प्रकरण एसआईटी के सुपुर्द कर दिया गया और जांच कराई गई। बीएसए कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद जिले में तैनात छह शिक्षकों को फर्जी मान लिया है और उनकी बर्खास्तगी का 22 जून 2019 को जारी किया गया पत्र प्रभावी मान लिया गया है। इनको विश्वविद्यालय ने भी फर्जी माना है। इनके अलावा हाईकोर्ट ने बाकी शिक्षकों के अंकपत्रों की विश्वविद्यालय से जांच कराकर रिपोर्ट लेने को कहा है। बताया जाता है कि कोर्ट ने कहा है कि विश्वविद्यालय जो रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, उसी को मान लिया जाएगा। यदि इन लोगों के अंकपत्र विश्वविद्यालय ने सही बताए तो उनका वेतन दे दिया जाएगा। फिलहाल इन 12 शिक्षकों का मई से वेतन रोक लिया गया है।
इन शिक्षकों की सेवाएं हुईं समाप्त
हाईकोर्ट के आदेश पर जिन छह शिक्षकों की बर्खास्तगी सही ठहराई गई है, उनमें दिलीप कुमार, मनोज कुमार तिवारी, राजेश कुमार, मनोज कुमार, आशीष कुमार सिंह और विपिन कुमार द्विवेदी शामिल हैं।
इन 12 शिक्षकों पर लटकी है तलवार
जिन 12 शिक्षकों शिक्षकों के बीएड अंकपत्र संदिग्ध हैं, उनमें जगत सिंह, सुवर्णा सिंह बघेल, अलकेश पांडेय, कुम्मेद बाबू, संतोष कुमारी कनौजिया, रेणू पवार, देवकी नंदन, रेखपाल सिंह, विपिन कुमार, अपूर्णा सिंह, पुष्पेंद्र कुमार शामिल हैं। इनके अंकपत्र डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा जांच को भेजे जाएंगे।
जो छह शिक्षक बर्खास्त हुए हैं, उन्हें एसआईटी जांच के बाद हाईकोर्ट ने फर्जी माना है। इसलिए 22 जून 2019 को जारी उनके बर्खास्तगी आदेश ही प्रभावी रहेंगे। शेष 12 शिक्षकों के बीएड अंकपत्र जांच को भेेजे जाएंगे। अगर विश्वविद्यालय उनके अंकपत्र और प्रमाणपत्र सही ठहराता है, तो उनको सेवा में बरकरार रखा जाएगा और रोका गया वेतन जारी कर दिया जाएगा।
राकेश कुमार, बीएसए