शाहजहांपुर। सीएचसी-पीएचसी पर इलाज की पर्याप्त सुविधा न मिलने का खामियाजा राजकीय मेडिकल कॉलेज को भुगतना पड़ रहा है। मौसम बदलने से मौसमी बीमारियों के बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। शनिवार को ओपीडी खुलते ही मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। जगह की कमी के कारण बुजुर्ग और कमजोर मरीज फर्श पर बैठकर और लेटकर डॉक्टर का इंतजार करते दिखाई दिए।
वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में 50 प्रतिशत से अधिक मरीज वायरल बुखार, टायफाइड, खांसी-जुखाम, पेटदर्द, त्वचा संबंधी बीमारियों के आ रहे हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में 430 बेड के सापेक्ष 427 मरीज भर्ती हैं। दबाव बढ़ने पर वार्डों में अतिरिक्त बेड भी डलवाए गए हैं।
सिंधौली की सुनीता, जलालाबाद की वेदवती और शहर की नेहा ने बताया कि सुबह आठ बजे आ गए थे। 11 बजे तक केवल पर्चा ही बनवा पाए हैं। अब डाॅक्टर को दिखाने व दवा लेने में करीब एक से डेढ़ घंटा और लगेगा। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण डॉक्टरों को अतिरिक्त समय देना पड़ रहा है।
जब तक सारे मरीजों का इलाज नहीं हो रहा, डॉक्टर बैठ रहे हैं। यहां पीलीभीत, हरदोई, फर्रुखाबाद और बरेली के फरीदपुर समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से भी मरीज पहुंच रहे हैं। लाइन में लगे मरीजों के लिए घंटों इंतजार करना मुश्किल हो गया है। कई बुजुर्ग गैलरी में सीमेंट की स्लैब और जमीन पर लेटकर प्रतीक्षा करते देखे जा सकते हैं।
सीएचसी-पीएचसी से रेफर होकर पहुंच रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज में बढ़ती भीड़ की एक बड़ी वजह ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं पर बढ़ता दबाव है। सामान्य बीमारी वाले मरीज भी सीएचसी-पीएचसी से मेडिकल कॉलेज भेजे जा रहे हैं। इससे ओपीडी के साथ भर्ती मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
स्ट्रेचर खींच रहे तीमारदार
मेडिकल कॉलेज में भीड़ के चलते काफी अव्यवस्थाएं फैल गईं हैं। तीमारदारों को अपने मरीजों को स्ट्रेचर से खुद वार्ड तक व जांच कराने के लिए ले जाना पड़ रहा है। तीमारदारों ने नाराजगी भी जताई है। उनका कहना है कि जिनके लिए यह सारी व्यवस्था की गई, उन्हीं मरीजों को परेशानी उठाना पड़ रही है।
खोले जाएंगे आठ नए पर्चा काउंटर
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आठ नए रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले जाएंगे। इससे पर्चा बनवाने के लिए लगने वाली लंबी लाइनों और घंटों के इंतजार से निजात मिलेगी। इस पूरी परियोजना के लिए 67 लाख रुपये का प्रस्ताव पास हो चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा।
इन दिनों में इतनी हुई ओपीडी
28 सितंबर को 2081, 29 सितंबर को 2011, 30 सितंबर को 1923 और एक अक्तूबर को 1562 मरीजों की ओपीडी हुई। तीन अक्तूबर को 2001 मरीज ओपीडी में पहुंचे।
कब कितने मरीज भर्ती हुए
28 सितंबर को 172, 29 सितंबर को 136, 30 सितंबर को 161, एक अक्तूबर को 126, दो अक्तूबर को 117 और तीन अक्तूबर को दोपहर एक बजे तक 51 मरीज भर्ती हुए।
मरीजों व तीमारदारों ने बयां किया दर्द
पत्नी नन्ही देवी की तबीयत ठीक नहीं है। सुबह आठ बजे जलालाबाद से मेडिकल कॉलेज आ गए थे। भीड़ के चलते 11 बजे तक पर्चा ही बन पाया है। अब डाॅक्टर को दिखाने के लिए लाइन में लगना पड़ेगा।
- मदनपाल, जलालाबाद
गिर जाने से शरीर में काफी तकलीफ है। सीएचसी से मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यहां सुबह से आए हुए हैं। दोपहर के 12 बज गए हैं लेकिन भीड़ के चलते अब तक डॉक्टर को नहीं दिखा पाए हैं।
-रामबेटी, तिलहर
सीएचसी पर कोई उपचार नहीं हुआ। मेडिकल कॉलेज में तीसरी बार आए हैं। न्यूरो सर्जन को दिखाना है, लेकिन आज वह छुट्टी पर हैं। अब दोबारा आना पड़ेगा।
- राजाराम, कुंआडांडा तिलहर
कई दिन से बुखार आ रहा है। सुबह नौ बजे मेडिकल कॉलेज आ गई थी। सवा 12 बज गया है, लेकिन अब तक नंबर नहीं आया। खड़ा नहीं हुआ जा रहा, इसलिए फर्श पर बैठकर बारी का इंतजार कर रहे हैं।
- मुन्नी, पुत्तूलाल चौराहा, शहर
मौसम बदलने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी है। सीएचसी-पीएचसी सहित गैर जनपदों के मरीज भी मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। सभी मरीजों का इलाज करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. सरोज कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
मुन्नी। संवाद
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