शाहजहांपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम तालाब अनदेखी के कारण बदहाल हैं। कहीं अवैध कब्जे हो गए हैं तो कहीं सूखे पड़े हैं। तिलहर के पीरगाह तालाब पर अवैध कब्जे होने से उसका आकार सिकुड़ रहा है। जलालाबाद में धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के रामताल का है भी यही हाल है। जैतीपुर में खेड़ा रठ गांव का पुराना तालाब दलदल में बदल जाने से कई पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो चुका है, लेकिन उसकी न तो सिल्ट सफाई कराई गई और न ही उसमें पानी भरे जाने का इंतजाम किया गया है। जैतीपुर के ही गांव बझेड़ा भगवानपुर के पुराने तालाब की भी देखरेख के अभाव में दुर्दशा हो रही है।
पीरगाह तालाब के कब्जों पर लगे लाल निशान
तिलहर। नगर के मध्य में स्थित ऐतिहासिक देव सरोवर पीरगाह तालाब अतिक्रमण की चपेट में है। तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर 15वें राज्य वित्त आयोग से 75 लाख रुपये नगरपालिका परिषद को प्राप्त हुए हैं। पालिका ने इसका निर्माण कार्य भी शुरू कराया, लेकिन इस बीच हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने निर्माण से पहले तालाब पर हुए अतिक्रमण हटाने की मांग की। तहसील प्रशासन ने तालाब की नाप पूरी कर ली है, लेकिन सर्वे टीम ने उसकी रिपोर्ट अभी प्रस्तुत नहीं की है और इसी वजह से अभी निर्माण रुका हुआ है। संवाद
रामताल के सौंदर्यीकरण में आड़े आए अवैध कब्जे
जलालाबाद। मोहल्ला खेड़ा में धार्मिक महत्व का तालाब रामताल अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सका है। परशुराम मंदिर से जुड़े इस तालाब के एक तिहाई हिस्से में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय से मिली धनराशि से घाट व सीढ़ियों का निर्माण कराया गया था, लेकिन कब्जे नहीं हटने से निर्माण रोकना पड़ा और करीब 50 लाख रुपये की बजट धनराशि केंद्र सरकार को लौट गई। हालांकि, रामताल की जमीन पर 20 लोगों के अवैध कब्जे पाए जाने पर उन्हें नगरपालिका ने नोटिस भी जारी किए, लेकिन बाद में कार्रवाई नहीं बढ़ सकी। एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी के निर्देश पर भी रामताल की नाप पूरा नहीं हो सकी है।
खेड़ा रठ के तालाब में हार जाती है जिंदगी
जैतीपुर। खेड़ा रठ ग्राम पंचायत में सैकड़ों वर्ष पुराना तालाब दशकों से सरकारी उपेक्षा का शिकार है। इस तालाब की कभी सफाई नहीं हुई। तालाब में लौकी घास उग आई है। बारिश में तालाब का पानी नहीं निकलने से मोहल्ले का रास्ता भी बंद हो गया है। तालाब में पानी सड़ने से दलदल बन गया है। आसपास दुर्गंध फैली रहती है। यदि कोई पशु तालाब में घुस गया तो वह दलदल में फंसकर जान गंवा देता है। श्रीपाल ने बताया कि अभी कुछ माह पहले एक सांड़ और एक गाय तालाब के दलदल में समा गए थे। उधर, बझेड़ा भगवानपुर गांव के तालाब के वर्ष 2010 में सफाई के बाद से कोई पुरसाहाल नहीं लिया है। संवाद
जलालाबाद के रामताल से अवैध कब्जे हटाने को उसकी पैमाइश का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जांच में अन्य तालाबों पर जहां कहीं अतिक्रमण पाया गया, उसे सख्ती से हटवाया जाएगा। गांवों में जो तालाब काफी पुराने और महत्वपूर्ण हैं, उनका अमृत सरोवर योजना में चयन कराकर बेहतर स्थिति में लाने का प्रयास होगा। -रामसेवक द्विवेदी, एडीएम प्रशासन