शाहजहांपुर। रीवैंप योजना के दूसरे फेज में नए दस बिजली उपकेंद्रों का निर्माण अभी नहीं होगा। इसके लिए दूसरे फेज में स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में उपभोक्ताओं को झटका लगेगा। ग्रामीण इलाकों में लोकल फॉल्ट के साथ ही कटौती से लोग जूझेंगे। हालांकि, अधिकतर जगह अफसरों ने जमीन तक चिह्नित ली थी।
वर्ष 2022 में रीवैंप योजना के पहले फेज में बंच लाइन, खंभे आदि बदलने का कार्य शुरू हुआ था। अप्रैल, 2025 में कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा होने के बावजूद अभी तक मात्र 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो पाया है। दूसरे फेज में जलालाबाद तहसील में चार, पुवायां में दो, तिलहर में एक और विद्युत वितरण खंड प्रथम में तीन उपकेंद्र बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली थी।
प्रत्येक उपकेंद्र में पांच-पांच एमवीए के दो ट्रांसफाॅर्मर लगाकर बिजली की व्यवस्था को बेहतर बनाना था। संभावना थी कि बजट सत्र में दूसरे फेज के लिए धनराशि जारी की जाएगी, लेकिन बजट जारी नहीं होने से मुख्यालय से उपकेंद्र को बनाने की स्वीकृति नहीं मिली।
इस वजह से उपकेंद्र बनाने के प्रोजेक्ट अटक गए। इससे ग्रामीण इलाके के लोगों को इस बार भी दुश्वारियों से जूझना पड़ेगा। गांवों में लंबी लाइन होने के साथ ही कम क्षमता के ट्रांसफॉर्मर होने से ओवरलोडिंग की समस्या रहती है।
तेज हवा चलने से तार टूटने समेत अन्य दिक्कतें होने से लोगों को बिजली मिलना मुश्किल होती है। जून-जुलाई की गर्मी में हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं।
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संडाखास में बिजली निगम ने बोर्ड तक लगा दिया था
-तिलहर डिवीजन के गढि़यारंगीन, जलालाबाद डिवीजन के परौर, पुवायां के देवकली और मुड़ियां कुर्मियात में उपकेंद्रों के लिए बिजली निगम के अभिलेखों में जमीन तक दर्ज हो गई थी। सल्लिया उपकेंद्र के लिए संडाखास में जमीन चिह्नित कर बिजली निगम ने बोर्ड तक लगा दिया था। इन जमीन को तलाश करने में अधिकारियों को काफी दुश्वारियों से जूझना पड़ा। अटसलिया औद्योगिक क्षेत्र, टिकरी, जलालाबाद के खजुरिया, बरीखास और सुजावलपुर में जमीन की तलाश अंतिम चरण में पहुंच गई थी। उपकेंद्रों की स्वीकृति नहीं मिलने से अधिकारी शांत होकर बैठ गए हैं।
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रीवैंप योजना के तहत दूसरे चरण में बनने वाले दस उपकेंद्रों को बनाने के लिए अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। हालांकि, उस पर अभी कार्रवाई चल रही है। संभावना है कि जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी।
जेपी वर्मा, एसई