शाहजहांपुर। मंडल में शाहजहांपुर के मनरेगा श्रमिकों का सबसे अधिक मानदेय बकाया है। इसकी वजह से मनरेगा से होने वाले विकास कार्य ठप हो पड़े हैं। दूसरे नंबर पर बरेली, तीसरे पर पीलीभीत और चौथे नंबर पर बदायूं है। दिसंबर से मानदेय नहीं आया है। अब भी आने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है।
केंद्र सरकार की योजना मनरेगा का हाल बुरा हो रहा है। मनरेगा श्रमिकों का मानदेय दिसंबर से नहीं मिला है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा से होने वाले कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कार्य अधूरे पड़े हुए है। विभाग का दावा है कि जनपद में वर्तमान में तीन हजार ग्रामीण प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण हो रहा है। इसमें दो हजार श्रमिक कार्य कर रहे हैं। पक्के अधूरे कार्य में करीब एक हजार श्रमिक कार्य करने में लगे हुए हैं। इसके अलावा अधिकतर श्रमिक मानदेय नहीं मिलने से काम नहीं कर रहे हैं।
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श्रमिकों का हो रहा मोहभंग
मनरेगा की ओर से 100 दिन के कार्य की गारंटी दी जाती है। आठ से 15 दिन में मानदेय की भुगतान प्रक्रिया पूरी हो जाती थी। वर्तमान में इस योजना में भुगतान की स्थिति खराब हो गई है। इसी वजह से श्रमिकों का मोहभंग हो रहा है। श्रमिक को मनरेगा से एक दिन की मजदूरी 237 रुपये मिलती है। वहीं, दूसरी जगह मजदूरी करने पर तीन से चार सौ रुपये आसानी से मिल जाते हैं।
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मंडल में मनरेगा श्रमिकों की मानदेय की स्थिति
जिला लंबित भुगतान करोड़ में सक्रिय श्रमिक लाख में
शाहजहांपुर 26.65 1.86
बरेली 24.34 1.87
पीलीभीत 20.63 1.58
बदायूं 18.32 1.50
मनरेगा केंद्र सरकार की योजना है। इसमें सरकार के स्तर पर ही श्रमिकों का भुगतान के लिए बजट भेजा जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही बजट आ जाएगा।
- डॉ. अपराजिता सिंह, सीडीओ