शाहजहांपुर। चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला दीवान जोगराज निवासी शरद चंद्र सक्सेना को डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ चार लाख 47 हजार रुपये की ठगी में लिप्त सात आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एमबीए पास युवक समेत अन्य आरोपी दो से दस प्रतिशत कमीशन के लिए एजेंट के रूप में कार्य करते थे। पुलिस सरगना की तलाश में जुटी है। बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी की जाएगी।
महात्मा श्री रामचंद्र के परिवार से जुड़े शरद सक्सेना को जून में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट किया था। आईपीएस और सीबीआई चीफ बनकर धोखाधड़ी के केस में जमानत देने के नाम पर 14 दिन तक फंसाए रखा। उनसे रुपये वसूलने के बाद बरी हाेने का प्रपत्र जारी कर मोबाइल बंद कर लिए।
एसपी सिटी देवेंद्र सिंह, सीओ सिटी पंकज पंत और सीओ अपराध प्रवीण मलिक के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर ठगी के बाद रुपये ट्रांसफर वाले खातों की जांच शुरू की। पुलिस को एक ऐसा खाता मिला, जिसके संदिग्ध लगने पर जांच की। बुधवार को पुलिस लाइन में पत्रकार वार्ता में एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि ठगों ने जमानत व सारे आरोपों से बरी करने के नाम पर चार खातों में एक करोड़ चार लाख 47 हजार 130 रुपये ट्रांसफर कर लिए थे।
धनराशि को फिनटेक फ्रॉड टीम ने नौ लेयर में 40 खातों में भेजा। धनराशि से 71 लाख रुपये हैदराबाद के काॅरपोरेट खाते में डाले गए। इसी खाते में लगभग तीन करोड़ रुपये और आए। जांच के दौरान खाताधारक को बुलाकर पूछताछ की गई। उसने पुलिस को बताया कि हैदराबाद में निवेश के नाम पर उसके खाते का मूल खाते के तौर पर दुरुपयोग किया गया। इसकी रिपोर्ट 27 मई को उसने दर्ज कराई थी।
उसके बाद सर्विलांस सेल के प्रयास से पुलिस ने फिनटैक साइबर ठगी टीम के सचिन अहिरवार निवासी रेलवे कॉलोनी रानी लक्ष्मी नगर शिपरी बाजार झांसी, प्रशांत कटारा निवासी जगनेर रोड थाना मलपुरा, आगरा, गौतम सिंह उर्फ लखनऊ ठाकुर निवासी संगम विहार, नई दिल्ली, संदीप कुमार पुंडीर निवासी मुरारी नगर थाना खुर्जा, जिला बुलंदशहर, सैयद सैफ उर्फ साेनू निवासी भारत कॉलोनी चादर गोदाम थाना खेड़ीपुल, फरीदाबाद, हरियाणा, आर्यन शर्मा निवासी श्रीराम कॉलोनी डासना थाना मसूरी जिला गाजियाबाद, पवन यादव निवासी ग्राम कनौरा सुनौनिया खस टीमगढ़ मध्य प्रदेश को गिरफ्तार किया।
गौतम सिंह एमबीए पास है। इनके पास से नौ मोबाइल, सात डेबिट कार्ड और एक पासबुक बरामद हुई। आरोपी कमीशन के लिए साइबर ठगी की घटना में सहयोग करते थे। प्रेसवार्ता के दौरान सीओ सिटी पंकज पंत और सीओ पुवायां प्रवीण मलिक भी मौजूद थे। साइबर ठगी में लिप्त आरोपियों की रिमांड अर्जी को न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय अंबेश पांडेय ने मंजूर कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों को रिमांड में लेकर पूछताछ करेगी।
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सीबीआई व न्यायालय के जज बनकर वसूले थे रुपये
शरद चंद्र सक्सेना को फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर फंसाया गया। उसके बाद व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर ही कथित न्यायालय के जज बनकर आरोपपत्र भेजा गया था। अधिकारियों ने बताया कि फर्जी अधिकारी बनकर फंसाने वालों को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा। कमीशन एजेंट के तौर काम करने वालों को पकड़ लिया गया है।
बैंक की भूमिका की जांच होगी
वारदात में लिप्त सात आरोपियों ने एक अन्य फिनटेक फ्रॉड से संबंधित जांच में एक बैंक के संदिग्ध खाते में नौ करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया। इसे भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस मुख्य आरोपी की तलाश में लग गई। इसके अलावा बैंक की भूमिका की जांच की जाएगी। इतनी अधिक धनराशि आने पर बैंक ने चुप्पी साध ली और पुलिस आदि को जानकारी नहीं दी।
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क्या है फिनटेक साइबर फ्रॉड
फिनटेक साइबर फ्रॉड एक आधुनिक डिजिटल धोखाधड़ी है। इसमें ठग वित्तीय तकनीक प्लेटफॉर्म्स जैसे मोबाइल वॉलेट, यूपीआई एप, डिजिटल लोन सेवाओं आदि का दुरुपयोग करते हैं। नकली वेबसाइट, ईमेल या एसएमएस के माध्यम से उपयोगकर्ता से उसकी संवेदनशील जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।
यूपीआई धोखाधड़ी : फर्जी क्यूआर कोड स्कैन करवाकर या कॉल के माध्यम से पिन डलवाकर खाते से पैसे निकालना।
लोन एप : अवैध या फर्जी ऋण एप इंस्टॉल करवाकर उपयोगकर्ता से व्यक्तिगत जानकारी लेना, फिर उसे ब्लैकमेल करना या मोबाइल डेटा का दुरुपयोग करना।
साइबर ठगी कॉल : खुद को बैंक अधिकारी, केवाईसी एजेंट या सरकारी अधिकारी बताकर कॉल करना और डराकर बैंकिंग जानकारी हासिल करना।
मालवेयर अटैक : किसी संदिग्ध लिंक या एप पर क्लिक करने से मोबाइल में वायरस आ जाता है, जो गोपनीय जानकारी चुराकर वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है।
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