खुदागंज (शाहजहांपुर)। तमाम दावों और वादों के बावजूद अब तक अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के पैतृक गांव नवादा दरोबस्त के दिन नहीं बदले हैं। गांव में समस्याओं का अंबार है। एक तरफ गांव की गलियों में कीचड़ की भरमार है वहीं दूसरी ओर बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसी समस्याएं भी हैं।
आदर्श ग्राम पंचायत के नाम पर दर्ज ग्राम नवादा दरोबस्त में गांव की कई गलियों में नाली नहीं बनी हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो साल पूर्व गांव में कई योजनाओं का शिलान्यास करके गए थे। इनमें डिग्री कॉलेज, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गर्रा नदी पर पुल का निर्माण प्रमुख था। शुरुआत में तो इन योजनाओं ने तेजी पकड़ी मगर बाद में मामला जहां का तहां ठहर गया। गांव में ओवरहेड टैंक बनवाया गया था, उससे सिर्फ दो महीने तक पानी की आपूर्ति हुई। पिछले करीब एक वर्ष से पानी की टंकी से ग्रामीणों को आपूर्ति नहीं हुई है। गांव में बिजली आपूर्ति की हालत भी बेहद खराब है। ग्रामीणों को 24 घंटे में बमुश्किल 8-10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। गांव में स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल है। ग्रामीणों का कहना है कि छुट्टा पशु फसल चर जाते हैं। मांग है कि गांव में एक गोशाला भी होनी चाहिए ताकि जानवरों से फसल को बचाया जा सके।
खुदागंज की खंड विकास अधिकारी सीमा रानी अग्रवाल ने बताया कि गांव में पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय, नाली निर्माण, इंटरलॉकिंग, विधवा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा से कच्चा कार्य आदि योजनाएं चल रहीं हैं। गांव में व्याप्त खामियों को दुरुस्त करने को ग्राम पंचायत अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं।
आजादी का जज्बा कूट-कूट कर भरा था ठाकुर रोशन सिंह में
तिलहर (शाहजहांपुर)। शाहजहांपुर की सरजमीं ने कई ऐसे सपूतों को जन्म दिया जिन्होंने राष्ट्र पर अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था। इनमे एक नाम काकोरी कांड के महानायक ठाकुर रोशन सिंह भी थे।
ठाकुर रोशन सिंह का जन्म शाहजहांपुर जिले के कस्बा खुदागंज के पास स्थित गांव नवादा दरोबस्त में 22 जनवरी सन 1892 को ठाकुर जंगी सिंह के यहां हुआ था। जब गांधी जी ने असहयोग का बिगुल बजाया तो ठाकुर रोशन सिंह भी पं. रामप्रसाद बिस्मिल के साथ मिलकर लोगों को जागरूक करने लगे। जब चौरी चौरा गोलीकांड के विरोध में बरेली में विशाल प्रदर्शन हुआ तो लाठीचार्ज के दौरान ठाकुर रोशन सिंह ने एक सिपाही की बंदूक छीनकर गोली चला दी। इस सिलसिले में ब्रिटिश सरकार ने उनको दो वर्ष की कड़ी कैद की सजा दी।
एसएस कॉलेज में इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि असहयोग आंदोलन की विफलता ने ठाकुर रोशन सिंह का झुकाव क्रांति की ओर कर दिया। हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के तत्वावधान में जब नौ अगस्त को काकोरी ट्रेन घटना हुई तो बिस्मिल, अशफाक आदि के साथ ठाकुर रोशन सिंह को भी अभियुक्त बनाया गया। हालांकि कई इतिहासकार मानते है कि रोशन सिंह काकोरी घटना में शामिल नही थे उनके एक हमशक्ल बंगाल अनुशीलन समिति के केशव चक्रवर्ती का इसमें हाथ था। रोशन सिंह दिसंबर 1924 को पीलीभीत के बमरौली में पड़ी डकैती के अगुवा थे। पुलिस ने बमरौली के साक्ष्यों का उपयोग काकोरी केस में किया। जब अदालत में जज ने राजद्रोह भड़काने के आरोप में सेक्शन 121(ए), 120 (बी) में पहली सजा पांच साल की सुनाई तब रोशन सिंह जोर से बोले, जो सजा बिस्मिल को दी गई, वही दी जाए। इस पर वकील विष्णु शरण ने रोशन सिंह के कान में कहा कि आपको वही सजा दी जा रही है। अगली सजा में बमरौली में मोहनलाल की हत्या के संदर्भ में जब ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई तब उन्होंने जोर से ‘भारत माता की जय’ कहा और बिस्मिल के गले लग गए।
19 दिसंबर 1927 को ठाकुर रोशन सिंह को इलाहाबाद की नैनी जेल में फांसी हुई । फांसी पर चढ़ते हुए अमर शहीद रोशन सिंह ने ‘वंदे मातरम’ तथा ‘ओम’ का उद्घोष किया। उस समय उनके सुर्ख होठों पर यह कौमी तराना तैर रहा था- जिंदगी जिंदादिली को जान-ए- रोशन। वरना कितने मरे और पैदा होते जाते हैं।
शहीद रोशन सिंह की जयंती पर समारोह आज संवाद
शाहजहांपुर। मुमुक्षु शिक्षा संकुल अधिष्ठाता व पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती की प्रेरणा से शहीद ठाकुर रोशन सिंह के जन्मदिवस पर ग्राम नवादा दरोबस्त में शहीद जन्मदिवस समारोह का आयोजन शुक्रवार को किया जाएगा। एसएस कॉलेज के एनसीसी केयरटेकर डॉ. आलोक कुमार सिंह ने बताया कि सुबह आठ बजे एनसीसी कैडेट्स की ओर से कटरा शहीद स्तंभ से नवादा दरोबस्त तक रिले दौड़ का आयोजन होगा। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा गोष्ठी होगी। समारोह में जिला कृषि विभाग की ओर से मेले का आयोजन भी होगा। संवाद