शाहजहांपुर। पाकिस्तान से दो बार युद्ध में शामिल हो चुके निगोही क्षेत्र के गांव हरपरा निवासी सेना के सेवानिवृत्त हवलदार सरदार कुंदन सिंह का मंगलवार को उनके आवास पर निधन हो गया। वह लगभग 87 वर्ष के थे।
वह दो बार निगोही गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान भी रहे। जीवन पर्यंत क्षेत्र में जनहित के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने से समाजसेवी के रूप में उनकी ख्याति थी। उनके पुत्र गुरविंदर सिंह, दरबारा सिंह, विक्रम सिंह का भी रो-रोकर बुरा हाल है। अंतिम संस्कार से पूर्व शाहजहांपुर छावनी से आए 167 कुमायूं रेजिमेंट इन्फेंट्री ब्रिगेड के नायब सूबेदार दीपक सिंह के नेतृत्व में पूर्व सैनिक के सम्मान में सलामी देते हुए पुष्प चक्र अर्पित किए।
गांव में ही शाम चार बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर सेना के अधिकारियों सहित विधायक सलोना कुशवाहा, नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज वर्मा आदि तमाम लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
शौर्य और साहस का पर्याय थे दिवंगत कुंदन सिंह
दिवंगत पूर्व सैनिक कुंदन सिंह अपने सेवाकाल में शौर्य और साहस का पर्याय थे। उन्होंने वर्ष 1965 व 1971 में भारत-पाकिस्तान की जंग में हिस्सा लेते हुए अपनी कोर की तरफ से अदम्य साहस का परिचय देकर दुश्मन को पराजित किया।
भारतीय सेना की ओर से उनको सैन्य सेवा मेडल, संग्राम मेडल, 25वें स्वाधीनता दिवस पर मेडल, नौ साल सेवा विस्तार मेडल, 20 वर्ष का लांग सेवा मेडल, रक्षा मेडल, समर सेवा मेडल, पश्चिमी स्टार मेडल आदि देकर सम्मानित किया गया था।