निगोही में प्लाई निर्माण करने वाली फर्म की जांच करती जीएसटी टीम। स्रोत : जीएसटी विभाग
शाहजहांपुर। कर बचाने के लिए बोगस फर्माें से माल खरीद के प्रपत्र तैयार करा लिए। जांच में मामला पकड़ में आने के बाद लकड़ी (विनियर) के कारोबारी पर जीएसटी एसआईबी ने 65 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कारोबारी ने 15 लाख रुपये जमा भी कर दिए हैं।
एडिशनल कमिश्नर जीएसटी, बरेली ओपी तिवारी के निर्देश पर मंगलवार को निगोही स्थित प्लाई निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे मैटेरियल विनियर की निर्माता एएच वुड प्रोडक्ट की जांच की। इसके मालिक नफासत खान हैं। डिप्टी कमिश्नर एसआईबी अनिरुद्ध सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर वेदप्रकाश शुक्ला और राज्य कर अधिकारी आरबी शर्मा ने जांच की। अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि डाटा विश्लेषण से पाया गया कि व्यापारी द्वारा लगभग पांच करोड़ की लकड़ी (विनियर) की बिक्री करते हुए मात्र छह हजार रुपये कर नकद में अदा किया गया था।
इस आधार पर व्यापारी के व्यापार स्थल की जांच की गई। जांच में पाया गया कि व्यापारी द्वारा नकद कर भुगतान से बचने और फर्जी आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के अर्जन के लिए दिल्ली में पंजीकृत बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों की अग्रवर्ती फर्जी फर्मों की शृंखला से केवल बोगस प्रपत्रों से खरीद दिखाई जा रही थी। वास्तव में माल खरीदा ही नहीं गया था। देय कर का समायोजन फर्जी या अदेय आईटीसी से किया गया है। व्यापार स्थल पर पाए गए संदिग्ध प्रपत्रों को जब्त कर लिया गया है। जांच में फर्म द्वारा प्रथमदृष्टया 3.56 करोड़ के सकल टर्नओवर का करापवंचन किया जाना पाया गया। टीम ने उस पर 65 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर व्यापारी द्वारा अपनी भूल स्वीकार करते हुए तत्काल 15 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा किए गए।