शाहजहांपुर। शासन ने क्षेत्र पंचायतों में मनरेगा से कराए जाने वाले विकास कार्यों की धनराशि के आहरण का अधिकार ब्लॉक प्रमुखों को दे दिया है, लेकिन जिले के ग्राम प्रधान इससे सहमत नहीं हैं। नई व्यवस्था के अनुसार मनरेगा के कार्यों का निर्धारण शासकीय तकनीकी कमेटी करेगी, लेकिन उन पर व्यय होने वाली धनराशि संबंधित खंड विकास अधिकारी और ब्लॉक प्रमुख के संयुक्त डिजिटल हस्ताक्षर से आहरित हो सकेगी।
हालांकि, ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अतिरिक्त होने वाले विकास कार्यों की धनराशि के आहरण का अधिकार पहले से ग्राम प्रधानों के पास है, लेकिन उनका कहना है कि क्षेत्र पंचायतों का निर्धारण ग्राम पंचायतों के क्षेत्रफल से ही होता है, इसलिए मनरेगा के भुगतान का अधिकार उनके पास रहना चाहिए। यह भी कहना है कि इस मद में होने वाले कार्यों के निर्धारण को ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों के बीच तालमेल बेहतर बनाने की जरूरत है।
ग्राम प्रधानों की बात
मनरेगा के कार्य जनहित से जुड़े होते हैं और उन्हें कराने के लिए ग्राम व क्षेत्र पंचायतों की आपसी सहभागिता होनी चाहिए। इससे विकास कार्य करने और उनकी कार्य योजना बनाने में सुगमता आएगी।
-रामचंद्र वर्मा, मरेना (जैतीपुर)
एक क्षेत्र पंचायत में तमाम ग्राम पंचायतें सम्मिलित होती हैं। क्षेत्र पंचायत द्वारा जिस ग्राम पंचायत में कार्य किया जा रहा है उस कार्य में उसी ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान को आहरण का अधिकार होना चाहिए।
-सोनपाल मौर्य, बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
क्षेत्र पंचायत के विकास कार्यों में उस ग्राम पंचायत की प्रत्यक्ष सहभागिता होनी चाहिए, जहां काम कराया जा रहा हो। इससे विकास का खाका सही तैयार होगा और किसी विवाद की नौबत नहीं आएगी।
-शिवसरन, करकौर (जैतीपुर)
ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र में क्षेत्र पंचायत स्तर से होने वाले कार्य में सहभागी बनाना चाहिए। इससे निचले स्तर पर सामंजस्य स्थापित होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी और सभी कार्य सुगमता से कराए जा सकेंगे। नई व्यवस्था लागू होने पर मनरेगा मजदूरी भुगतान को लेकर विवाद के हालात बन सकते हैं।
-लालू प्रसाद प्रजापति, जिला महासचिव, राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन
रामचंद्र वर्मा।- फोटो : SHAHJAHANPUR
सोनपाल मौर्य।- फोटो : SHAHJAHANPUR
लालू प्रसाद प्रजापति।- फोटो : SHAHJAHANPUR