फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जयंती आज : पर्यटनस्थल घोषित होने के बाद विशेष होगा भगवान परशुराम जन्मोत्सव

विज्ञापन
जलालाबाद के मंदिर में स्थापित अति प्राचीन भगवान परशुराम की मूर्ति । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
विज्ञापन
अशोक कुमार द्विवेदी
विज्ञापन

जलालाबाद। भगवान परशुराम की जयंती मंगलवार को अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाएगी। वह भगवान विष्णु के छठे अंशावतार माने जाते हैं। मान्यता है कि जलालाबाद का जमदग्नि आश्रम ही परशुराम का जन्मस्थान है। प्रदेश सरकार द्वारा हाल में ही इसे पर्यटन स्थल घोषित किए जाने के बाद भारी खुशी और उत्साह के बीच यहां भगवान का जन्मोत्सव मनाए जाने की तैयारी है।
भगवान परशुराम मंदिर के महंत सत्यदेव पांडेय ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार भगवान परशुराम भार्गव वंशीय भृगु मुनि के प्रपौत्र ऋषि जमदग्नि व माता रेणुका की संतान थे। जन्म के समय इनका नाम राम था। बद्रिकाधाम में उनके द्वारा की गई घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने शास्त्र और शस्त्र विद्या दोनों का ज्ञान देने के साथ उन्हें ‘त्रैलोक्य विजय’ नामक अद्भुत कवच दिया था। जब इन्होंने ‘परशु’ नाम का खास अस्त्र धारण किया तब से वह परशुराम नाम से विख्यात हुए। दुष्टों के संहार के साथ उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए भी अनेको कार्य किए। बताते है कि उस कालखंड मे एक बार जब भीषण अकाल पड़ा तब हिमालय पर्वत से रामगंगा का प्रवाह मोड़कर उसे इस क्षेत्र में लाने का श्रेय भगवान परशुराम को ही जाता है। संवाद
विज्ञापन

मुगल काल में बदला गया था नाम
दो साल पहले नगर पालिका बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यहां का नाम बदलने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। नगर का नाम बदलने का प्रमाण नगर की अति प्राचीन निजाम शाह बर्री मियां की दरगाह में कुछ साल पहले तक मौजूद रही ‘तस्वीर मासूम उलररूफ़ रहनुमाये तरीकत’ नामक किताब है। इतिहासकार तथा भगवान परशुराम पर शोध करने वाले ब्रह्मानंद ने अपनी किताब ‘भगवान परशुराम शोध गाथा’ में लिखा है कि धर्म का प्रचार करने 1034 हिजरी में यहां आये निजाम शाह द्वारा लिखित इस पुस्तक में कहा गया है कि उस दौरान पूरे क्षेत्र में घोर जंगल था। एक टीले पर मंदिर स्थापित था, जिसके आसपास मंदिर के सेवादार जोगी साधू रहते थे और यह क्षेत्र जोगीखेड़ा के नाम से जाना जाता था। मुगल शासन में रोहिला सरदार नजीब खां के पुत्र रहमत खां ने अपने मंझले पुत्र जलालुद्दीन का विवाह करके इस इलाके को अपनी पुत्रवधू को मेहर में दे दिया। इसके बाद इसका नाम जोगीखेड़ा से बदलकर जलालाबाद रख दिया गया।
विज्ञापन

आज यह होंगे मुख्य आयोजन
प्रात: भगवान परशुराम नगरी की ढोल-नगाड़े के साथ भक्तों द्वारा पैदल परिक्रमा। दोपहर 12 बजे से मंदिर प्रांगण में हवन, पूजन और भगवान का जलाभिषेक। शाम को भगवान की मंगला आरती व घर-घर दीपोत्सव। चार मई को सुबह दस बजे मंदिर से शोभायात्रा का शुभारंभ। दोपहर तीन बजे भंडारा।

जलालाबाद में भगवान परशुराम का मंदिर। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें