परिषदीय स्कूलों में घट रही छात्र-छात्राओं की संख्या पर गंभीर रुख अपनाते हुए डीएम ने एक माह से स्कूल न आने वाले बच्चों की सूची बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही स्कूल न आने वाले बच्चों को स्कूल से बाहर का रास्ता दिखाने का आदेश भी दिया है। हालांकि इससे पहले अभिभावकों को इस आशय का नोटिस से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
डीएम के कहा कि परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या बहुत कम रहती है। इससे मालूम पड़ता है कि शिक्षक अपना कार्य निष्ठापूर्ण ढंग से नहीं कर रहे हैं या वे लोग बच्चों में शिक्षण के प्रति रुचि पैदा नहीं कर पा रहे हैं। कहा कि बच्चों की विद्यालयों में उपस्थिति जरूर होनी चाहिए। निर्देश दिए कि एक महीने से गैरहाजिर बच्चों की सूची बनाकर उनके कार्यालय में उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उनके अभिभावकों को इस आशय का नोटिस भी दिया जाए जिसमें बताया जाए कि उनके बच्चे स्कूल नहीं आएंगे तो उनका नाम विद्यालय से काट दिया जाएगा।
डीएम के इस आदेश के अनुपालन में बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को इससे संबंधित निर्देश दिए हैं। यदि इस आदेश का कड़ाई के साथ पालन किया गया तो परिषदीय स्कूलों में नामांकित हजारों छात्र-छात्राएं विद्यालय से बाहर हो जाएंगे।
‘लगातार छात्र-छात्राएं नहीं विद्यालय में नहीं आते हैं तो उनका नाम काट दिया जाएगा। ऐसे मामलों में बच्चों का नामांकन दूसरे विद्यालयों में होता है। प्रधानाध्यापक को ऐसे बच्चों की जांच करने के बाद विद्यालय से नाम हटा देना चाहिए।’
-शशिदेवी शर्मा, एडी बेसिक, बरेली
‘विद्यालयों में नहीं आने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को नोटिस देने के निर्देश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए जा चुके हैं। नोटिस के बाद भी बच्चे स्कूल नहीं पहुंचते हैं तो उनका नाम विद्यालयों से काट दिया जाएगा। इस संबंध में शासन को भी सूचना दे चुका हूं।’
-राजेश वर्मा, बीएसए