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डॉक्टर्स डे: संघर्ष के पथ पर, आसमान छूने की ख्वाहिश

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मयंक वर्मा,
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शाहजहांपुर। मन में हौसला हो तो मंजिल मिल ही जाती है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे कुछ भावी चिकित्सकों को बेहद संघर्षों से जूझना पड़ा। कभी-कभी तो आस ही टूट गई थी, लेकिन मन में सपना था मेहनत के बलबूते पर माता पिता के नाम को रोशन करने का। मेधा और मेहनत के बूते चिकित्सा पेशे को चुनने वाले ये छात्र-छात्राएं भविष्य में समाजसेवा के ध्येय को भी साथ लेकर चल रहे हैं। संवाद
हादसों के शिकार होने के बावजूद भी पिता ने दिया हौसला
मुजफ्फरनगर के गांव सोरन निवासी आदित्य कुमार के पिता एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं। हादसे में पिता के जख्मी होने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया। इसके बावजूद पिता ने बेटे की पढ़ाई में रुकावट नहीं पड़ने दी। पिता के इलाज पर हुए खर्च को देखते हुए आदित्य ने चिकित्सीय पेशा अपनाने की ठानी। प्रथम प्रयास में असफल रहने के बावजूद भी हार न मानते हुए दूसरे प्रयास में कामयाबी हासिल की। आदित्य कहते हैं कि वे हर उस परिवार का सहारा बनना चाहते हैं जो बदलाव की चाह रखकर आगे बढ़ना चाहता है।
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पढ़ाई के लिए खुद को कर दिया समर्पित
एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अविनाश मिश्रा कहते हैं कि एमबीबीएस की सीट हासिल करना आसान नहीं था। नीट को उत्तीर्ण करने के लिए उन्हें दो वर्ष लगे। चिकित्सकीय सेवा में जाने के लिए उन्होंने खुद को पढ़ाई के प्रति समर्पित कर दिया था। परिवार समेत किसी अन्य समारोह में जाना छोड़ दिया था। कई बार लोगों की प्रतिकूल टिप्पणियों का सामना भी किया। कोविड-19 संक्रमण के चलते एक बार जब परीक्षा स्थगित कर दी गई थी तब वे काफी हताश हो गए थे लेकिन हार नहीं मानी। अविनाश डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहते हैं। संवाद
परिवार कम पढ़ा-लिखा मगर डॉक्टर बनेगी मनु
एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा मनु जैन कहती है कि उनके परिवार में कोई भी ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। जब उन्होंने पहली बार कोटा जाकर मेडिकल की तैयारी करने की बात अपने माता-पिता के सामने रखी तो उनके लिए यह बात स्वीकारना बेहद मुश्किल हो रहा था। मनु के भरोसा दिलाने पर माता-पिता मान गए। पहली बार में चयन न होने पर पूरे भरोसे के साथ उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 2019 में नीट में चयन हो गया। मनु कहती हैं कि वे चिकित्सा सेवा के साथ-साथ ऐसे साधनहीन बच्चों को भी हौसला देंगी जो कि मेडिकल लाइन में जाना चाहते हैं।
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बीमारियों से जूझने के बावजूद पाई सफलता
जनपद मथुरा निवासी एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रितु कुंतल बताती हैं कि वे नीट की तैयारी के लिए कोटा गई थीं। वहां अवसाद का शिकार हो गईं। कोरोना के चलते लॉकडाउन लग गया। इसकी वजह से उन्हें घर आना पड़ा। फिर घर आकर बीमार हुईं जांच में पता चला कि कोरोना पॉजिटिव हो गईं हैं। पुन: जांच कराई गई तो टीबी का संक्रमण भी मिला। इससे उभरने के लिए उन्हें तीन महीने लग गए। बीमारियों से जूझने के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार वालों ने हौसला दिया। इससे कामयाबी हासिल हुई। वह भी डॉक्टर बनकर लोगों की मदद करना चाहती हैं।

रितु कुंतल- फोटो : SHAHJAHANPUR

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