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वृद्धावस्था पेंशन घोटाला : निलंबित समाज कल्याण अधिकारी समेत नौ पर लगा गैंगस्टर

Sun, 02 Jun 2024 03:01 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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शाहजहांपुर। वृद्धावस्था पेंशन घोटाले के आरोपी निलंबित जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार और उसके आठ साथियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की गई है। राजेश कुमार को गैंग का सरगना बताया गया है।
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मार्च 2023 में समाज कल्याण विभाग में वृद्धावस्था पेंशन घोटाले का खुलासा हुआ था। जालसाजों ने जिला समाज कल्याण अधिकारी के डोंगल का इस्तेमाल कर 2390 बुजुर्गों की पेंशन दूसरे खातों में भेज दी थी। मामला सामने आने के बाद समाज कल्याण निदेशालय ने राजेश कुमार को निलंबित कर दिया था। लगभग दो करोड़ 52 लाख 39 हजार रुपये के घोटाले में 20 सितंबर को वर्तमान जिला समाज कल्याण अधिकारी वंदना सिंह की ओर से राजेश कुमार समेत नौ आरोपियों को नामजद करते हुए सदर बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

फरवरी में राजेश कुमार ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था, तब से वह जेल में है। सदर बाजार थाने के प्रभारी निरीक्षक रवींद्र सिंह ने उप्र गिरोहबंद समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा 2 और 3 के तहत सभी नौ आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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रिपोर्ट में लिखा गया कि सभी नौ आरोपियों ने गिरोह बनाकर योजनाबद्ध ढंग से 2022-23 के वृद्धावस्था पेंशन योजना के पात्र लाभार्थियों के स्थान पर पीएफएफएस सर्वर में अपना डोंगल और डिजिटल हस्ताक्षर कर अपात्र व्यक्तियों के खाता परिवर्तन कर सरकारी धन का गबन किया। राजेश कुमार गैंग का प्रमुख है। डीएम के अनुमोदन के बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

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इनके खिलाफ हुई कार्रवाई

राजेश कुमार निवासी तुलसीपुर कुडवा, मुहम्मदाबाद, मऊ। रामऔतार निवासी खपटी, कांट। सतीश कश्यप निवासी निकरा, कांट। पप्पू निवासी पल्हौरा, कांट। अनूप कुमार निवासी गांव कचनार जना, सीतापुर। जयपाल कश्यप निवासी कुर्रियाकलां, कांट। राजीव कश्यप निवासी गांव कमलनैनपुर, कांट। विशाल निवासी सबलापुर, पुवायां। सूरज निवासी गांव खरगपुर बिलरियां, नीमगांव, खीरी।

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ऐसे खुला था घोटाला
जिले में एक लाख दो हजार बुजुर्गों को समाज कल्याण विभाग की ओर से एक हजार रुपये मासिक पेंशन जारी होती है। पिछले साल मार्च में जिले के तमाम बुजुर्गों के खाते में जब पेंशन की रकम नहीं पहुंची तो उन्होंने समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगाने शुरू किए। रोजाना शिकायत आने पर अधिकारियों ने जांच कराई तो घोटाले की परतें खुलने लगीं।
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