शहर के नर्सिंग होम्स के पास अनिवार्य लाइसेंस ही नहीं
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स्वास्थ्य विभाग से अनुमति से लेकर शहर में भले ही नर्सिंग होम चल रहे हैं लेकिन इनमें से किसी के भी पास शासन द्वारा लागू नई नियमावली के तहत स्थानीय निकाय से विधिक लाइसेंस हासिल नहीं किया गया है। नगर पालिका परिषद ने बीते सितंबर माह में शहर के सभी 41 नर्सिंग होम को नई नियमावली के तहत लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पत्रक जारी किया लेकिन 20 नर्सिंग होम संचालकों ने तो उसे रिसीव तक नहीं किया। जिन 21 ने रिसीव भी किया उनमें से एक ने भी लाइसेंस के लिए आवेदन ही नहीं किया। अब पालिका प्रशासन सभी को नियमावली के विभिन्न धाराओं के तहत विधिक नोटिस जारी कर रही है।
शासन द्वारा लागू नियमावली नर्सिंग होम पर नियंत्रण उपविधि के तहत हर नर्सिंग होम को पांच हजार रुपये नगर पालिका परिषद में जमाकर अनिवार्य लाइसेंस प्राप्त करना है। इस नियमावली के अनुसार, नगर पालिका परिषद से उक्त उपविधि के अंतर्गत अनुज्ञा प्राप्त किए बिना ही अस्पताल या नर्सिंग होम निर्माण या संचालन अपराध है। इसके तहत अनुज्ञा प्राप्त किए बिना नर्सिंग होम भवन का निर्माण करने पर 10 हजार रुपये, अनुज्ञा प्राप्त किए बिना किसी वर्तमान भवन या परिसर में नर्सिंग होम भवन का संचालन करने पर 5000 रुपये और अनुज्ञा के बिना नर्सिंग होम भवन निर्माण ौर संचालन पर 20 हजार रुपये दंड का प्रावधान है। शहर के जिन 21 नर्सिंग होम ने पालिका परिषद द्वारा जारी इस संबंधी पत्रक को रिसीव किया गया है उनमें शेखर अस्पताल, डा. अनवार हास्पिटल, सिंह नर्सिंग होम, निपुण हास्पिटल, चौधरी हास्पिटल, टंडन नर्सिंग होम, नवज्योति चिकित्सालय, बीएन बहन मेमोरियल हास्पिटल, शीला हास्पिटल एवं नर्सिंग होम, गुरु नानक हास्पिटल, आयुष्मान हास्पिटल, बालाजी हास्पिटल, डा. अनूप अग्रवाल नर्सिंग होम आदि शामिल हैं।
अधिशासी अधिकारी मुनेंद्र सिंह राठौर ने बुधवार को बताया कि शासकीय निर्देशों एवं नियमों की अनदेखी कर पालिका प्रशासन से बिना लाइसेंस लिए ही नर्सिंग होम चलाने वाले संचालकों को अब विधिक नोटिस जारी किया जा रहा है एवं उन पर इसके लिए तय धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई करते हुए अर्थदंड वसूला जाएगा।