बहुचर्चित सुखजीत सिंह हत्याकांड में शनिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव ने एनआरआई पत्नी रमनदीप कौर को फांसी और उसके प्रेमी गुरुप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने मामले की विवेचना में लापरवाही बरतने पर डीजीपी से विवेचक राजेश कुमार सिंह के खिलाफ एक सप्ताह में कार्रवाई की अनुशंसा की।
शाहजहांपुर के बहुचर्चित सुखजीत सिंह हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव ने एनआरआई पत्नी रमनदीप कौर को फांसी और उसके प्रेमी गुरुप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा की घोषणा करते हुए रमनदीप के अपराध को गुरुप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू से ज्यादा गंभीर माना है।
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अदालत ने टिप्पणी की है कि पढ़ी-लिखी और संपन्न परिवार से होने के बावजूद केवल अपने अनैतिक संबंधों को बढ़ाने के लिए रमनदीप ने अपने उस पति का बेरहमी से कत्ल कर दिया जिससे उसे दो बच्चे थे। इस वजह से रमनदीप कौर का मामला विरल से विरलतम श्रेणी में आता है। जबकि मिट्ठू का मामला इस श्रेणी में नहीं आता।
अदालत ने अपने फैसले में महात्मा गांधी और एंटोन चेखों के उन उद्गार का हवाला दिया जिसमें फांसी की सजा का विरोध किया गया है। अदालत ने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियां अलग थीं तब लोगों में प्रेमभाव था और इंसानियत जिंदा थी। आज के समय में मनुष्य के पास सबकुछ होते हुए भी उसके हृदय में क्रूरता, लालच और अमानवीयता ने जगह ले ली है।
इस मामले में केवल अपने अनैतिक संबंधों के लिए गुरुप्रीत और रमनदीप ने सुखजीत की जान ले ली। अदालत ने कहा कि केवल सुखजीत की हत्या नहीं हुई, विधवा मां के बुढ़ापे के सहारे की हत्या हुई, उसके दोनों बेटों के बचपन और उनकी खुशियों की हत्या हुई। यह हत्या किसी आवेश में आकर नहीं की गई बल्कि केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए सुनियोजित ढंग से की गई।
अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने पास एक पत्थर को भी रख ले तो एक महीने बाद उसे फेंकने में हिचकाता है क्योंकि उसे उस पत्थर से लगाव हो जाता है। यहां रमनदीप ने अपनी कई बरस पुरानी शादी और दो बच्चों की मौजूदगी के बावजूद पति की प्रेमी के साथ मिलकर बेरहमी से हत्या कर दी।
रमनदीप ने शादी के बंधन को समाज की बेड़ियां समझा और अय्याशी के लिए हत्या की। अदालत ने अपराध को भयावह बताते हुए आदेश में कहा कि भारतीय समाज में एक शादीशुदा महिला के पास इतनी ताकत होती है कि वह यमराज के मुंह से अपने पति को जिंदा बचा लाती है।
इस प्रकरण में रमनदीप कौर ने खुद अपने प्रेमी के साथ मिलकर चाकू से गला काटकर पति को यमराज के पास भेज दिया। इससे ज्यादा भयावहता एक शादीशुदा आदमी की जिंदगी में क्या हो सकती है कि पत्नी ही सुनियोजित ढंग से उसकी हत्या कर दे।
अपराधी के सुधार की संभावना नहीं, अपने किए का पछतावा भी नहीं
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रमनदीप कौर के सुधरने का जहां तक प्रश्न है, सुधरता वह है जो बिगड़ा होता है। रमनदीप ने एक पेशेवर अपराधी की तरह घटना को अंजाम दिया। ऐसे लोगों के सुधरने की भविष्य में कोई संभावना नहीं रहती। रमनदीप कौर की उम्र 37-38 के लगभग है। उस पर कोई निर्भर नहीं है क्योंकि उसके बच्चे विदेश में अपनी बुआ के पास रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
बेटे अर्जुन ने तो यहां तक बयान दिया कि अब वह उसकी मां नहीं सिर्फ रमनदीप कौर है। अदालत ने पाया कि मुकदमा चलने के दौरान रमनदीप के व्यवहार से कभी ऐसा नहीं लगा कि उसे अपने किए का कोई गम है। चार अक्तूबर को सुनवाई के दौरान वह तेज आवाज में अपनी सास से झगड़ा कर रही थी। रमनदीप कौर के पास ब्रिटिश नागरिकता है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक है जिस तरह से रमनदीप ने अपने पति की क्रूरतापूर्वक हत्या की है, वह मृत्युदंड से ही दंडित किए जाने योग्य है। यदि ऐसे लोगों को कड़ी सजा नहीं दी जाएगी तो कोई भी मां अपने घर बहू लाने से पहले हजार बार सोचेगी। साथ ही ऐसे लोग समाज में पैदा होते रहेंगे और लोगों के जीवन से खिलवाड़ करते रहेंगे।