शाहजहांपुर। सेंट्रल बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के वार्षिक चुनाव का मतदान 23 दिसंबर को होना है। इसको लेकर प्रत्याशियों ने जहां एड़ी-चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। वहीं मतदाताओं ने भी अपने प्रत्याशी को चुनने के लिए कमर कस ली है। बस इंतजार मतदान की प्रक्रिया के शुरुआत होने की है। इससे प्रत्याशी अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
सेंट्रल बार एसोसिशन के चुनाव को लेकर वर्तमान में जितनी सरगर्मी और बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ा है, उतना पहले के चुनावों में देखने को नहीं मिलता था। पहले चुनाव बिना धन खर्च किए और हाथ उठाकर पदाधिकारियों को चुनकर हो जाता था, लेकिन अब चुनाव में धन और खाने-पिलाने का चलन बढ़ गया है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव को लेकर पूर्व पदाधिकारियों व वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कुछ ऐसा ही कहना है।
दावत उड़ाने तक ही सीमित रह गया चुनाव
पहले जो सीनियर एडवोकेट होता था, उसको ही अध्यक्ष चुन लिया जाता था। सेंट्रल बार एसोसिएशन का प्रथम चुनाव नरेंद्र कुमार सक्सेना व बसंत लाल खन्ना के बीच हुआ था। अब परिवर्तन आया है। यह मालूम ही नहीं हो रहा कि बुद्धिजीवियों का चुनाव है। खाने-पीने, दावत उड़ाने तक ही चुनाव सीमित रह गया है। पहले साफ सुथरा चुनाव होता था। अब धन बल का प्रयोग अधिक होने लगा है। जोकि गलत परंपरा है, इस पर रोक लगनी चाहिए। - कौशल किशोर वाजपेयी, पूर्व ज्वाइंट सेक्रेटरी, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
जातिवाद और बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ा
पहले और अब के बार चुनाव में बहुत परिवर्तन आया है। नरेंद्र कुमार सक्सेना व बसंत लाल खन्ना के बीच पहला चुनाव हुआ था। उससे पहले सर्वसम्मति से पदाधिकारी चुन लेते थे, बाबू दर्शन सिंह काफी समय तक अध्यक्ष रहे। अब के चुनाव में तीन चीजें बहुत बुरी तरीके से फैल रही हैं पहला जातिवाद, दूसरा धनबल का प्रयोग और तीसरा बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ा है। जिस पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। चुनाव अधिवक्ता हितों को ध्यान में रखकर लड़ा जाए। - रामकुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे बालकराम
बार एसोसिएशन के चुनाव में कोई विशेष अंतर दिखाई नहीं पड़ता है। 1983 में सेंट्रल बार एसोसिएशन का गठन हुआ था। तब जो व्यवस्था थी, अब भी वही चली आ रही है। चुनाव प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुसार संपन्न कराई जाती है। करीब 20 साल पहले बाबू बालकराम एडवोकेट को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था। उसके बाद से चुनाव के माध्यम से ही अध्यक्ष व महासचिव समेत सभी पदों के पदाधिकारियों को चुना जाता है। चुनाव कराया जाना सही है। - विशेश्वर सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता
संगठन से साझेदारी में अच्छे व्यक्तियों का आना जरूरी
पिछले कई चुनाव देखे हैं, इस चुनाव में काफी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। साफ-सुथरे प्रत्याशी उतरे हैं। किसी तरह की दावत आदि पर जोर नहीं दिया जा रहा है। सर्वसम्मति से कोई व्यक्ति नहीं चुना जा रहा है, लेकिन चुनाव संगठन का है उससे साझेदारी में अच्छे व्यक्तित्व आए यह बड़ी बात है। बताया कि अध्यक्ष के कार्यकाल में अच्छे कार्यों का भी विरोध झेला। इसका मलाल है कि जिस तरह से विकास कार्य करवाना चाहते थे वह नहीं हो पाया। - बांके बिहारी मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, सेंट्रल बार एसोसिएशन
कौशल किशोर वाजपेयी, पूर्व ज्वाइंट सेक्रेटरी, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन- फोटो : SHAHJAHANPUR
ामकुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता- फोटो : SHAHJAHANPUR
विशेश्वर सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता- फोटो : SHAHJAHANPUR