कोला घाट का टूटा पुल का । फाइल फोटो
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लखनऊ/शाहजहांपुर। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने अपनी रिपोर्ट में शाहजहांपुर में पुल गिरने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है। पुल के खंभे (पीयर) के झुके होने और उनमें दरार का जिक्र जरूर किया है। यह भी कहा है कि जो खंभा (पी-7) गिरा है, उस कुएं की गहराई आदि जानने के लिए गहन जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक कुएं में कोई काम न कराया जाए।
दरअसल, शाहजहांपुर के जलालाबाद में कोलाघाट के पास रामगंगा और बहगुल नदी पर बने 18 सौ मीटर लंबे पुल का लगभग दो सौ मीटर हिस्सा 29 नवंबर, 2021 को गिर गया था। यह पुल 2009 में बना था। महज 11 वर्षों में पुल का ढहना सेतु निगम के प्रबंधन के लिए भी चिंता का सबब है। इसकी जांच सीआरआरआई के विशेषज्ञों से कराई गई थी। रिपोर्ट सेतु निगम को मिल गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुल के अधिकतर कुओं के पास रेत जमा होने से ये स्पष्ट नहीं दिखाई दिए। कुछ जगहों पर जहां पानी था, वहां एक कुआं ज्यादा तिरछा दिखा। एक कुएं के ऊपर खंभा एक कोने पर पाया गया। कुछ गर्डर्स में हनीकांबिंग (छोटे छेद या गैप) और लीचिंग (खराब ढंग से कंक्रीट डालने से गैप) पाई गई। कहीं-कहीं सरिया भी बाहर निकली मिली। कुछ खंभों में भी हनीकांबिंग देखी गई। गर्डर को जोड़ने वाले अधिकतर ज्वाइंट भी टूटे मिले। एक तरफ के आखिरी खंभे की बेयरिंग भी बाहर की तरफ झुकी मिली। कुछ मिलाकर यह रिपोर्ट निर्माण कार्य में खामियों की ओर इशारा कर रही है। लेकिन इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है। हर कुएं के पास मिट्टी की जांच के लिए बोरहोल बनाने का सुझाव दिया गया है। पीडब्ल्यूडी के कुछ इंजीनियरों ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि पुल ढहने की असली वजह जानने के लिए यह रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है। इसके लिए गहन जांच की जरूरत है।
अभी विस्तृत जांच की जरूरत
निर्माण कार्य के सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) की जांच रिपोर्ट अभी प्राथमिक स्तर की है। इसकी विस्तृत जांच होने के बाद ही पुल गिरने की सही वजह सामने आएगी। पुल गिरने के बाद सेतु निगम ने मृदा परीक्षण का कार्य शुरू कराया था लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया था। जांच सीआरआरआई के पास जाने के बाद अन्य एजेंसियां जांच नहीं कर रही हैं। बताया जा रहा है कि सीआरआरआई विस्तृत जांच के लिए धनराशि मिलने के बाद काम शुरू करेेगी। मिट्टी की जांच भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके लिए लंबी बोरिंग कराई जाएगी। मृदा परीक्षण से पता चलेगा कि पुल का पूरा कुआं जमीन में धंसने के पीछे की असली वजह क्या रही थी। इसके लिए टीम को एक से दो हफ्ते तक घटनास्थल पर कैंप करना होगा। आधुनिक मशीनों की मदद से खुदाई कर घटना की असल वजह सामने लाई जाएगी।