शाहजहांपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के नाम पर 30 हजार से ज्यादा पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई। ऐसे में इन स्थानों पर हरियाली गायब हो गई है। दो हाईवे पर पेड़ कटान की रकम सरकारी खजाने में जमा कर ली गई। हाईवे के स्थान पर गैर जनपद या दूसरे स्थानों पर जमीन तलाश करके पौधरोपण करने का दावा किया जा रहा है।
लखनऊ-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कई वर्षों से चल रहा था। वन विभाग की मानें तो नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के लिए केंद्र सरकार की तरफ से वर्ष 2011-12 में 12,758 पेड़ काटने का परमिट दिया गया था। इसके एवज में दोगुने 25,516 पौधे लगाए गए थे। हालांकि नेशनल हाईवे पर दूर-दूर तक हरियाली नजर नहीं आती।
छह लेन राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीच में हरित पट्टी के लिए डिवाइडर बनाया गया। इस पर एनएचएआई को पौधरोपण करना था, लेकिन जिले की सीमा हुलास नगरा क्रॉसिंग तक कहीं भी पेड़ पौधे दिखाई नहीं दे रहे हैं। डिवाइडर भी कई जगह तोड़ दिए गए हैं। वन विभाग का दावा है कि काटे गए पेड़ों के एवज सें खुटार, जलालाबाद आदि क्षेत्र में पौधरोपण किया गया था, लेकिन यह दावा कागजों तक ही सीमित रह गया।
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लखनऊ-पलिया हाईवे पर काटे गए 4731 पेड़, पौधरोपण नहीं हुआ
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लखनऊ-पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियामतपुर मोड़ से खुटार तक सड़क चौड़ीकरण के लिए 4731 पेड़ों का कटान हुआ। इस हाईवे के चौड़ीकरण होने से 26.40 हेक्टेयर जमीन पेड़ कटान से प्रभावित हुई है। इसके एवज में 54 हेक्टेयर जमीन को सोनभद्र जिले में चिह्नित किया गया है। यहां पर पौधरोपण किया जाएगा। नियामतपुर मोड़ से खुटार तक पेड़ कटान होने से सड़क वीरान हो गई है। कभी सड़क के दोनों ओर पेड़ होने से सूरज की तपिश का अहसास कम होता था। पेड़ यहां काटे गए और दूसरे जिले में पौधरोपण किया जाएगा।
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731-के सतवां बुजुर्ग से बीसलपुर तक हरीभरी सड़क हुई वीरान
731-के नेशनल हाईवे सतवां बुजुर्ग रिंगरोड से बीसलपुर बार्डर खनंका पुल तक 33 किमी सड़क को फोनलेन किया जा रहा है। इस हाईवे पर 5933 पेड़ का कटान किया जा रहा है। वन विभाग के मुताबिक, 10 गुना पेड़ लगाने के लिए एनएचएआई की ओर से 3802 प्रति पेड़ की कीमत के हिसाब से 10 गुना रकम करीब 22 करोड़ 55 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा करा दी गई। पौधरोपण कहां और कब किया जाना है, इसका निर्णय वन विभाग लेगा। इस हाईवे का जनपद के सबसे हरियाली वाले हाईवे के रूप में गिना जाता था। अब इस हाईवे किनारे हरियाली नहीं रह गई है।
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बरेली मोड़ से जलालाबाद तक 5046 पेड़ों का होगा कटान
शाहजहांपुर के बरेली मोड़ से जलालाबाद के याकूबपुर तिराहे तक करीब 29 किलोमीटर की दूरी वाले लिपुलेख भिंड मार्ग (संख्या 29) को फोरलेन का निर्माण कार्य पेड़ कटान की अनुमति नहीं मिलने से अटका है। इस हाईवे पर पीडब्ल्यूडी ने 5046 पेड़ों को कटान के लिए चिह्नित किया है। प्रशासन ने पौधरोपण के लिए शाहजहांपुर, जलालाबाद और तिलहर क्षेत्र में 50 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की है। वन विभाग ने भी जमीन का सर्वे कर सहमति जता दी है। प्रशासन की ओर से जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संभावना है कि इसी माह पेड़ कटान का कार्य शुरू हो जाएगा।
अजीजगंज-चौहनापुर-मदनापुर मार्ग पर 1838 पेड़ का कटान
अजीजगंज से चौहनापुर से कांट होते हुए मदनापुर तक 61 किमी का पिछले वर्ष चौड़ीकरण किया गया। चौड़ीकरण में 1838 पेड़ का कटान हुआ। वन विभाग ने पीडब्ल्यूडी से पेड़ कटान के एवज में 10 गुना राशि सरकारी खजाने में जमा करा ली। वन विभाग की तरफ से अभी तक निर्णय नहीं लिया गया है, काटे गए पेड़ों की जगह 10 गुना पौधरोपण कहां किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण में पेड़ का कटान होने के एवज में पहले दो गुना पौधरोपण किया जाता था। अब 10 गुना पौधरोपण किए जाने का शासनादेश है। जहां जमीन उपलब्ध होती है वहां पर पौधरोपण कराया जाता है।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ