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UP: स्वास्थ्य विभाग में 100 करोड़ से अधिक का घोटाला, शाहजहांपुर के डीएम बोले- दोषियों से की जाएगी रिकवरी

Thu, 10 Apr 2025 04:47 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर

सार

Shahjahanpur Scam News:  स्वास्थ्य विभाग में उपकरणों और अन्य सामग्रियों की खरीद में घोटाला किया गया। डीएम ने 100 सौ करोड़ से अधिक का घोटाला होने का अंदेशा जताया है। हालांकि इसकी पूरी तस्वीर शासन स्तर से जांच के बाद साफ होगी।
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डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शाहजहांपुर के जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग में उपकरणों और अन्य सामग्रियों की खरीद में सौ करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का अंदेशा जताया है। पूर्व सीएमओ डॉ. आरके गौतम के कार्यकाल में हुई खरीद की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जिस स्टेथोस्कोप का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तीन सौ रुपये है, उसे 15 सौ में खरीदा गया था।

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डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि दोषी पूर्व सीएमओ समेत सात अफसर और कर्मचारियों से इसकी रिकवरी की जाएगी। हालांकि, घोटाले की पूरी तस्वीर पूर्व सीएमओ के तीन साल के कार्यकाल की शासन स्तर से जांच के बाद साफ होगी। जिला पंचायत अध्यक्ष ममता यादव ने स्वास्थ्य विभाग में सामान खरीद में गड़बड़ी की शिकायत डीएम से की थी। डीएम ने सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। सीडीओ के निरीक्षण में ददरौल सीएचसी के भंडारगृह में भारी मात्रा में फर्नीचर और मेडिकल उपकरण बरामद हुए थे।

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दिखाया गया था कि कोरोना काल के दौरान 86 उपकेंद्रों के लिए सामान खरीदा गया था। जांच में पता चला कि 86 उपकेंद्र कागजों पर ही थे। पुराने जिला अस्पताल परिसर के दो स्टोर में भी जांच समिति ने भारी मात्रा में सामान बरामद किया था। तत्कालीन सीएमओ डॉ. गौतम बिना आपत्ति किए बिलों को पास करते रहे। घोटाले में प्रधान सहायक संजय सिंह, लेखा प्रबंधक चंद्र प्रकाश पांडेय, प्रशासनिक अधिकारी राम किशोर, एसीएमओ डॉ. मनोज मिश्र पर भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

गुमराह कर की गई खरीदारी 
स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आ रहे हैं। शीर्ष अफसरों की आंखों में धूल झोंककर न केवल गैरजरूरी व गुणवत्ताविहीन सामान की खरीदारी की गई, बल्कि अधिकतम खुदरा दर से कई गुने का भुगतान भी किया गया। जो सामान फुटकर में पांच से दस रुपये का मिल जाता है। थोक में लेने के बावजूद उसके लिए 90 से 110 रुपये खर्च किए गए या यूं कहें कि सरकारी रुपये लुटाए गए। टीम ने स्वास्थ्य विभाग में खरीद से जुड़ीं दस पत्रावलियों की जांच की है। जांच में सामने आया कि सामानों के लिए एमआरपी से कई गुना कीमत भी अदा की गई। 

एक स्टेशनरी दुकानदार के मुताबिक, पेन पांच से दस रुपये में मिल जाता है। एक राइटिंग पैड 15, फोल्डर 15, चार्ट पेपर पांच, पेंसिल चार, इरेजर तीन, शॉर्पनर पांच रुपये में फुटकर में कहीं भी खरीद सकते हैं। इन सामान की कीमत कई गुना दिखाई गई है। 

गैरजरूरी सामान भी खरीदा गया 
सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह ने बताया कि जिस स्टेथोस्कोप की एमआरपी 300 रुपये है, उसे 15 सौ रुपये में खरीदा गया। इसके अलावा भारी मात्रा में गैरजरूरी सामान की खरीद की गई। अगर किसी ब्लॉक में सौ आशा कार्यकर्ता हैं तो वहां 300 स्टेथोस्कोप खरीदे गए, जिनकी जरूरत ही नहीं थी।  खरीद फाइलों में दिखाई जाती थी, जबकि मौके पर सामान नहीं मिलता था। जो सामान मिलता भी था तो वह गुणवत्ताविहीन होता था। किसी भी मद का पैसा किसी भी मद में इस्तेमाल कर लिया जाता था। तीन स्टोर सीज करने के बाद मामले की जांच में पाया गया कि 10-10 लाख रुपये के अलग-अलग बिल बनाए गए थे। 

इन बिलों को तत्कालीन सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने जिला स्वास्थ्य समिति के संज्ञान में लाए बगैर स्वीकृत कर दिया था। माना जा रहा है कि तत्कालीन सीएमओ के तीन वर्ष के कार्यकाल में सौ करोड़ रुपये से अधिक के गैरजरूरी सामान की खरीदारी की गई है।  जांच में चार आउटसोर्सिंग कर्मचारी भी दोषी पाए गए हैं। उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी। 
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सामान बेचने वाली फर्म भी निशाने पर
जिस फर्म ने सामान की आपूर्ति की है, उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। डीएम ने बताया कि शासन स्तर से गठित होने वाली टीम में जिला स्तर के अधिकारी को शामिल कर जांच कराने की मांग की गई है। जांच में दोषी मिले लोगों को निलंबित करने के बाद रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही जिन फर्माें से सामान की खरीद की गई है, वे भी जांच के दायरे में आएंगी। वहीं, बताया जा रहा है कि एक कर्मचारी ने भी अपनी फर्म बना रखी थी। उसको भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। 

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डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सौ करोड़ से अधिक रुपये का घोटाला होने की संभावना है। बगैर जरूरत के टेंडर निकाले, बिलों को बनाकर खरीद की गई है। जांच में दोषियों के विरुद्ध जल्द कार्रवाई होने की संभावना है। इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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