गुमराह कर की गई खरीदारी
स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आ रहे हैं। शीर्ष अफसरों की आंखों में धूल झोंककर न केवल गैरजरूरी व गुणवत्ताविहीन सामान की खरीदारी की गई, बल्कि अधिकतम खुदरा दर से कई गुने का भुगतान भी किया गया। जो सामान फुटकर में पांच से दस रुपये का मिल जाता है। थोक में लेने के बावजूद उसके लिए 90 से 110 रुपये खर्च किए गए या यूं कहें कि सरकारी रुपये लुटाए गए। टीम ने स्वास्थ्य विभाग में खरीद से जुड़ीं दस पत्रावलियों की जांच की है। जांच में सामने आया कि सामानों के लिए एमआरपी से कई गुना कीमत भी अदा की गई।
एक स्टेशनरी दुकानदार के मुताबिक, पेन पांच से दस रुपये में मिल जाता है। एक राइटिंग पैड 15, फोल्डर 15, चार्ट पेपर पांच, पेंसिल चार, इरेजर तीन, शॉर्पनर पांच रुपये में फुटकर में कहीं भी खरीद सकते हैं। इन सामान की कीमत कई गुना दिखाई गई है।
गैरजरूरी सामान भी खरीदा गया
सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह ने बताया कि जिस स्टेथोस्कोप की एमआरपी 300 रुपये है, उसे 15 सौ रुपये में खरीदा गया। इसके अलावा भारी मात्रा में गैरजरूरी सामान की खरीद की गई। अगर किसी ब्लॉक में सौ आशा कार्यकर्ता हैं तो वहां 300 स्टेथोस्कोप खरीदे गए, जिनकी जरूरत ही नहीं थी। खरीद फाइलों में दिखाई जाती थी, जबकि मौके पर सामान नहीं मिलता था। जो सामान मिलता भी था तो वह गुणवत्ताविहीन होता था। किसी भी मद का पैसा किसी भी मद में इस्तेमाल कर लिया जाता था। तीन स्टोर सीज करने के बाद मामले की जांच में पाया गया कि 10-10 लाख रुपये के अलग-अलग बिल बनाए गए थे।
इन बिलों को तत्कालीन सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने जिला स्वास्थ्य समिति के संज्ञान में लाए बगैर स्वीकृत कर दिया था। माना जा रहा है कि तत्कालीन सीएमओ के तीन वर्ष के कार्यकाल में सौ करोड़ रुपये से अधिक के गैरजरूरी सामान की खरीदारी की गई है। जांच में चार आउटसोर्सिंग कर्मचारी भी दोषी पाए गए हैं। उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।
सामान बेचने वाली फर्म भी निशाने पर
जिस फर्म ने सामान की आपूर्ति की है, उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। डीएम ने बताया कि शासन स्तर से गठित होने वाली टीम में जिला स्तर के अधिकारी को शामिल कर जांच कराने की मांग की गई है। जांच में दोषी मिले लोगों को निलंबित करने के बाद रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही जिन फर्माें से सामान की खरीद की गई है, वे भी जांच के दायरे में आएंगी। वहीं, बताया जा रहा है कि एक कर्मचारी ने भी अपनी फर्म बना रखी थी। उसको भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।
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डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सौ करोड़ से अधिक रुपये का घोटाला होने की संभावना है। बगैर जरूरत के टेंडर निकाले, बिलों को बनाकर खरीद की गई है। जांच में दोषियों के विरुद्ध जल्द कार्रवाई होने की संभावना है। इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी।