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सत्ता का सहचर साबित होता रहा एमएलसी चुनाव

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आशीष त्रिपाठी
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शाहजहांपुर। शाहजहांपुर-पीलीभीत विधान परिषद का चुनाव सत्ता के साथ-साथ चलता रहा है। जिस तरह इस बार सत्ताधारी भाजपा को प्रचंड जीत हासिल हुई है, उसी तरह पिछले चुनाव में सपा प्रत्याशी ने एकतरफा जीत दर्ज की थी। तब भाजपा प्रत्याशी वर्तमान सरकार में सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके पहले भी सभी चुनावों में सत्तारूढ़ दलों का ही दबदबा रहा। भाजपा को एमएलसी के चुनाव में दूसरी बार सफलता मिली है।
पिछला शाहजहांपुर-पीलीभीत विधान परिषद सीट के लिए चुनाव 2016 में हुआ था। तब 3583 मतदाता थे। सत्ताधारी दल सपा ने अमित यादव रिंकू को प्रत्याशी बनाया था। अमित को 2792 वोट मिले थे, जबकि निकट प्रतिद्वंद्वी भाजपा के जेपीएस राठौर तमाम प्रयास के बावजूद 586 वोट पा सके थे। जेपीएस राठौर महज 17 वोट से अपनी जमानत बचा पाए थे। 2004 में सत्तासीन सपा ने जयेश प्रसाद को उतारा था। वह भी एकतरफा जीत हासिल कर विधान परिषद पहुंचे थे।
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सरकार बदलने पर जयेश प्रसाद ने बसपा का दामन थाम लिया था। 2010 में बसपा ने जयेश को प्रत्याशी बना दिया। वहीं, सपा ने अमित यादव को पहली बार चुनावी मैदान में उतारा। बसपा सत्ता में थी, लेकिन अमित यादव ने मुकाबले को काफी कड़ा कर दिया था। अंत में 162 वोटों से जयेश प्रसाद की जीत हुई थी। हालांकि तब अमित यादव को 15 सौ से अधिक वोट मिले थे। अमित ने निरस्त किए 311 वोटों को आधार बनाकर दोबारा मतगणना भी कराई, लेकिन परिणाम नहीं बदला।
2012 में सपा की सरकार वापस सत्ता में लौटी तो 2016 में हुए विधान परिषद चुनाव में अमित यादव ने शानदार जीत दर्ज की। वक्त बदला, सरकार बदली और इस बार भाजपा ने कोई गलती नहीं की। सौम्य स्वभाव के डॉ. सुधीर गुप्ता को पार्टी ने एकजुट होकर लड़ाया, जिसका सुफल पार्टी को मिला। सपा प्रत्याशी अमित यादव अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। (संवाद)
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पहली बार जिले से एक भी सपाई विधानमंडल में नहीं
1992 में सपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है, जब जिले में पार्टी का एक भी नेता विधानमंडल का सदस्य नहीं है। 1993 में पहली बार सपा चुनाव में उतरी और शाहजहांपुर में उसे दो सीटें मिलीं। 1996, 2002 में एक-एक, 2007 में दो, 2012 में सपा को तीन सीटें मिलीं थीं। 2004 में जयेश प्रसाद सपा के टिकट पर एमएलसी बने थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बावजूद सपा से शरदवीर सिंह ने जलालाबाद सीट जीती थी। 2022 के विस चुनाव में जलालाबाद सीट भी भाजपा ने छीन ली। अब इकलौते सपा के एमएलसी अमित यादव भी चुनाव हार गए। इस हार के साथ वर्तमान उत्तर प्रदेश विधानमंडल में जिले से सपा का एक भी जनप्रतिनिधि नहीं है।
जिले से अब तक हुए एमएलसी
1. पुरुषोत्तम दास टंडन ( लगभग 14 वर्ष एमएलसी रहे। कमलापति त्रिपाठी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री भी रहे)
2. कुं ज्योति प्रसाद (कांग्रेस से दो बार 1960-69 तक एमएलसी रहे)
3. जितेंद्र प्रसाद (कुं. ज्योति प्रसाद के निधन के बाद कांग्रेस से 1970 में एमएलसी बने)
4. श्याम सुंदर (जितेंद्र प्रसाद के त्यागपत्र देने के बाद छह साल एमएलसी रहे)
5. जगदीश सिंह (1990 से 2002 तक पहली बार जनता दल व दूसरी बार भाजपा से एमएलसी रहे)
6. जयेश प्रसाद (2004 से 2010 तक सपा और 2010 से 2016 तक बसपा से एमएलसी रहे)
7. अमित यादव (2016 से 2022 तक सपा से एमएलसी रहे)
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