भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद के लिए एक नहीं कई चेहरे हैं और सभी दमदार हैं लेकिन पार्टी सीएम के चेहरे पर नहीं बल्कि पीएम के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी। अन्य दलों के पास पार्टी मुखिया के अलावा अन्य कोई चेहरा है ही नहीं इसीलिए मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपना ही नाम घोषित कर रखा है। भाजपा ने विरोधियों के खिलाफ इस बार पिछले चुनावों से हटकर रणनीति तैयार की है। भाजपा का थिंक टैंक इस दिशा में लगातार होमवर्क भी कर रहा है और दूसरों दलों पर नजर भी रखे हुए है।
क्या रणनीति रहेगी विधानसभा चुनाव में भाजपा की, इस सवाल पर पार्टी जिलाध्यक्ष राकेश मिश्र कहते हैं कि अभी तक चुनाव धर्म और जाति के आधार पर लड़े जाते थे मगर इस बार जाति बंधन से दूर विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जा रहा है। वर्ष 2012 के चुनाव के बाद के अंतिम लगभग ढाई साल (केंद्र सरकार में भाजपा के कार्यकाल) में जाति बंधन से निकलकर लोगोें ने विकास का महत्व समझा है। चूंकि भाजपा संगठनात्मक प्रक्रिया पर जोर देती है, इसलिए चुनाव की पूरी तैयारी बूथ और समितियों पर ही निर्भर रहेगी। वीडियो वैन और मोटरसाइकिलों से भी प्रचार-प्रसार में पार्टी ने ताकत झोंकी है।
सर्वे रहेगा टिकट वितरण का आधार
जिलाध्यक्ष मिश्र कहते हैं कि इस बार पार्टी केवल जिताऊ प्रत्याशियों का चयन कर रही है और इसके लिए बाकायदा व्यक्तित्व, छवि और पिछले चुनावों की परफारमेंस के आधार पर सर्वे किया गया है और वही चुनाव में टिकट का आधार रहेगा।
नोटबंदी का फायदा मिलेगा
नोटबंदी के निर्णय को 95 फीसदी जनता ने स्वीकार किया है और परेशानी उठाकर भी इसकी सराहना की है। केवल पांच फीसदी लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं। नोटबंदी के निर्णय का काफी फायदा भाजपा को मिलेगा।
स्वार्थपूर्ण है कांग्रेस से गठबंधन की बात
सपा परिवार की लड़ाई पर जिलाध्यक्ष ने कहा कांग्रेस से सपा सिर्फ इसलिए गठबंधन की बात कर रही है क्योंकि उसे केंद्र में अपनी ताकत बढ़ानी है, जबकि कांग्रेस का यूपी में काई वजूद ही नहीं है। यह गठबंधन स्वार्थ का है। भाजपा की आंधी से बचने के लिए कांग्रेस को सपा ढाल के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।
सवर्णों को बिखरने नहीं देगी भाजपा
जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के पास दलित, पिछड़ा और सवर्ण सभी के नेतृत्वकर्ता मौजूद हैं, इसलिए टिकट का वितरण भी समानरूप से किया जाएगा लेकिन सवर्ण मतदाताओं को बिखरने नहीं दिया जाएगा। जो प्रत्याशी होगा, उसी को जिताने का संकल्प लिया गया है। सपा-बसपा के साथ होने वाली लड़ाई में कांग्रेस के खेल पर पार्टी की पूरी नजर रहेगी, इसके लिए थिंक टैंक पूरी तरह तैयार है। इसीलिए 16 जनवरी तक प्रबुद्ध वर्ग, अनुसूचित वर्ग, किसान वर्ग और व्यापारी वर्ग के सम्मेलन कराए जाएंगे।