जलालाबाद। भगवान परशुराम की नगरी को रामायण सर्किट में शामिल कर उसे पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग को लेकर बुधवार को राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट के तत्वावधान में भगवान परशुराम निशान यात्रा निकाली गई। शंख, घंटा की ध्वनि व भजन कीर्तन के साथ भगवान परशुराम की जय-जयकार के बीच निकली इस यात्रा का नगर में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा का स्वागत किया।
यात्रा के स्वागत के लिए नगर में कई स्थानों पर तोरणद्वार भी बनाए गए थे। अपराह्न करीब 11 बजे शाहजहांपुर रोड स्थित उबरिया मंदिर से शुरू हुई यह निशान यात्रा करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद परशुराम मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। हर तरफ से भगवान परशुराम के जय-जयकार का उद्घोष था। यात्रा बारहपत्थर चौराहे से नगर में प्रवेश करने के बाद रामताल रोड, तहसील रोड, बरेली फर्रुखाबाद हाईवे के बाद वैष्णो प्रिंटिंग प्रेस होते हुए परशुराम मंदिर पहुंची और शाम चार बजे उसका समापन हो गया।
यात्रा में अयोध्या से आए कथा वाचक मानस किंकर जी महाराज, महंत सत्यदेव पांडेय, पूर्व चेयरमैन संजय पाठक, ट्रस्ट के अध्यक्ष अशित पाठक, आलोक शुक्ला, वीटू गुप्ता, जिला पंचायत सदस्य नीरज मिश्रा, ब्रजेश मिश्रा, अवनीश द्विवेदी, टीटू भारद्वाज, इशांक दीक्षित, अभिषेक दीक्षित, गोपाल मोहन द्विवेदी , मनोज अग्निहोत्री, उमेश श्रीवास्तव, शानू गुप्ता, निखिल गुप्ता, प्रदीप मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, सौरभ कुशवाहा, शिवम तिवारी आदि शामिल रहे।
प्राचीन स्थल है उबरिया
मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म नगर से एक किलोमीटर पश्चिम गांव ढकियाइन स्थित जमदग्नि आश्रम में हुआ था। सहस्राबाहु से संग्राम के बाद उन्होंने हैहयवंशीय राजाओं के समूल नाश का संकल्प लिया था। वर्षों बाद जब वह लौटे तब तक उनके कई पूर्वज स्वर्ग सिधार चुके थे। जहां आज उबरिया मंदिर के नाम का प्राचीन स्थल है, वहां उस दौरान जंगल था और वहां से होकर रामगंगा निकली थीं। भगवान परशुराम ने अपने मृत पूर्वजों का यही पिंडदान किया था।