लोक गोमती अध्ययन यात्रा के दौरान गोमती आरती करते लोग
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पुवायां। लोकभारती संस्था की ओर से गोमती पुनर्जीवन अभियान के तहत पुवायां क्षेत्र में पन्नघाट से मस्तान घाट तक की अध्ययन यात्रा का आयोजन किया गया। मंगलवार सुबह सात बजे दोनों घाटों के बीच हुई अध्ययन पद यात्रा से पूर्व लोगों ने गोमती नदी में स्नान कर गोमती आरती की। यात्रा में जलधार की वास्तविक स्थिति, तट क्षेत्र में सघन वन और हरित पट्टी विकसित करने की संभावनाएं, नदी संरक्षण के लिए अन्य आवश्यक कार्यों पर चर्चा की गई।
अध्ययन यात्रा में यह भी साफ हुआ कि गोमती तट क्षेत्र अतिक्रमण का शिकार है और अभी भी जलधार क्षेत्र तक मिट्टी डालकर अवैध कब्जा करने का प्रयास जारी है। तय किया कि किसानों से संपर्क कर गोमती संरक्षण में सहयोग लेने के साथ तट क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धति और बागवानी विकसित करने और तट क्षेत्र में खाली पड़ी नदी भूमि पर सघन वन विकसित किया जाएगा। बैठक में तय हुआ कि घाट को स्वच्छ रखने और गोमती सेवा से ग्रामीणों को जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक पूर्णिमा को धार्मिक आयोजन किया जाएगा। संयोजन लोकभारती के मार्गदर्शन में कार्य कर रही संस्था ‘कामधेनु अवतरण अभियान’ के द्वारा रहेगा।
यात्रा में पाया गया कि दोनों घाटों के बीच बाबा लक्ष्मणदास का स्थान पड़ता है। यह स्थान घाट के रूप में विकसित नहीं है, लेकिन संत लक्ष्मण दास के नाम के प्रति लोगों में श्रद्धा है। स्थान को महत्ता के अनुरूप विकसित करने का निर्णय लिया गया। बिलसंडी के प्रधान और कार्यक्रम के संयोजक संजय त्रिपाठी ने जलपान की व्यवस्था की।
पदयात्रा में विहिप के प्रांत मंत्री राजीव सिंह, लोकभारती के क्षेत्र संयोजक संजय उपाध्याय, नदी संरक्षण के प्रांत प्रमुख डॉ. विजय पाठक, राष्ट्रीय सह संपर्क प्रमुख नीरज सिंह, आशुतोष मिश्र, बाबा रुद्र देवानंद, बाबा पुरुषोत्तम दास, आचार्य अंबिका, पूर्व प्रधान रामनरेश, उदयराज चौहान, प्रमोद सिंह, लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, उपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।