शाहजहांपुर। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव तथा चौरी चौरा शताब्दी समारोह के अंतर्गत नगर निगम व जिला प्रशासन के तत्वावधान में पर्यटन व संस्कृति विभाग के सहयोग से खिरनीबाग मेला मैदान में राष्ट्रभक्ति कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देर रात तक श्रोता कविताओं का लुत्फ लेते रहे।
शुरुआत में कवियों ने मां शारदे व अमर शहीद पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला खां व ठा. रोशन सिंह के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पार्पण कर की। लखीमपुर खीरी से आए ओज के कवि आशीष ने सुनाया- ‘शब्द अगर मंत्र है तो होता कवि उसका आराधक है। कविता अगर तपस्या है, तो कवि ही उसका साधक है।’ फरमाइश पर उन्होंने मशहूर तिरंगा रचना भी सुनाई। दिल्ली से आए कवि डॉ. सुनील जोगी ने ‘भारत माता के कोटि-कोटि बेटे आबाद नहीं होते। इस अमर तिरंगे के सारे रंग जिन्दाबाद नहीं होते...’ रचना सुनाई।
अध्यक्षता करते हुए बनारस से आये वरिष्ठ कवि भूषण त्यागी ने सुनाया- ‘हंसते-हंसते जो सरहद पर जूझ गए, एक दीपउनकी खातिर भी जला सखे...’
अलवर (राजस्थान) से आए वीर रस के कवि विनीत चौहान ने देश प्रेम की भावनाओं को जी भर उभारा। उन्होंने ‘श्रीनगर में गूंज रहे जो देशद्रोह के नारे हैं। ठंडी झीलों से निकले ज्यो जलते से अंगारे हैं...’ सुनाया। संचालन कर रहे बाराबंकी के कवि रामकिशोर तिवारी ने ‘कण-कण बोलता है वंदे मातरम जहां, क्रांतिकारियों की गाथा ललित ललाम है...’ सुनाई।
संयोजक कवि डॉ. इंदु अजनबी ने अपनी पुस्तक शत-शत नमन काकोरी से सुनाया- ‘याद रखो कि आजादी यह खेल खेल में नहीं मिली। शोणित से सींचा वीरों ने तभी मुक्ति की फसल खिली...’ अंत में सभी कवियों का शाल ओढ़ाकर व स्मृति चिह्न भेंटकर अभिनंदन किया। संयोजन में साहिल इक़बाल का विशेष सहयोग रहा।
कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, सफाई आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ, नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा, अपर नगर आयुक्त एसके सिंह, एसडीएम सदर दशरथ कुमार, सहायक नगर आयुक्त अंगद गुप्ता, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह यादव, डॉ. कविता भटनागर, अनिल दीक्षित, लालित्य पल्लव, शोभित गुप्ता, सरोज मिश्र, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्म, अभिषेक औदीच्य, विकास सोनी, पारस शर्मा, प्रशांत मिश्र, नितेश गुप्ता, निकुंज गुप्ता, अंकित मिश्रा, शिवा सक्सेना, शिवांशु मणि त्रिपाठी, विनय प्रताप सिंह, उमेश पांडेय आदि उपस्थित रहे। एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी ने आभार जताया।