कंबोज जाति के लोगों को पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र जारी नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र के कई प्रधानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन विधायक शकुंतला देवी को देकर कंबोज जाति को पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र जारी कराने की मांग की है।
अधिवक्ता राजपाल सिंह कंबोज ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि कंबोज जाति के लोग सिख धर्म से ताल्लुक रखते हैं। वे 50 वर्षों से प्रदेश में रहकर खेतीबाड़ी कर रहे हैं। 1993 में सपा सरकार ने शासनादेश जारी कर उन्हें पिछड़ी जाति में शामिल किया था। प्रमाणपत्र भी जारी होने लगे लेकिन 2008 में बसपा सरकार ने इस पर रोक लगा दी।
11 अक्तूबर 13 को फिर शासनादेश जारी कर दिया गया है। इसे तहसीलदार लागू नहीं कर रहे हैं। तहसीलदारों का कहना है कि शासनादेश यह स्पष्ट नहीं करता है कि कंबोज को पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जाए। पत्र पर बंडा के कुआंडांडा की प्रधान संतोष कुमारी गुप्ता, गुनहा खमरिया के प्रधान परमजीत सिंह, लालपुर आजादपुर की प्रधान माधुरी देवी, उदरा टिकरी की प्रधान मंजूलता, बंडा के ब्लाक प्रमुख तौलेराम वर्मा, आलमपुर पिपरिया के प्रधान कमलेश कुमार सहित कई प्रधानों के हस्ताक्षर हैं। विधायक ने मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखकर समाधान कराए जाने का आश्वासन दिया है।