शाहजहांपुर। चार साल पहले तिलहर के डॉक्टर के घर पड़ी डकैती का पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है। डकैतों तक पहुंचने के बजाए पुलिस पीड़ित के परिचितों और कंपाउंडरों से पूछताछ करती रही। घटना के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी को निलंबित कर तत्कालीन एसपी ग्रामीण ने घटना के खुलासे के लिए एसओजी को लगाने के साथ खुद एक सप्ताह कैंप भी किया था। खुलासे में असफल पुलिस ने एक वर्ष बाद ही 2018 में मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल को बंद कर दिया।
थाना तिलहर क्षेत्र के बहदुल्लागंज निवासी डॉ. विजेंद्र गुप्ता, पत्नी मृदल गुप्ता, बेटी नेहा गुप्ता और बेटे के साथ रहते हैं। डॉ. विजेंद्र का मकान के पास ही क्लीनिक है। सात अक्तूबर 2017 की सुबह करीब आठ बजे डॉ. विजेंद्र क्लीनिक पर जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी उनके दरवाजे पर कुछ लोग आए और मरीज का इलाज कराने की बात कहकर दरवाजा खुलवाया। करीब पांच-छह लोग डॉक्टर के मकान में घुस गए। अंदर जाते ही डॉक्टर, उनकी पत्नी-बेटी के मुंह पर टेप लगाकर उनके हाथ-पैर बांधकर कमरे में बंद कर दिया था। करीब एक घंटे तक डकैतों ने लूटपाट की और दीवार फांदकर भाग गए।
एफआईआर के अनुसार तीन लाख रुपये की नकदी और एक लाइसेंसी रिवाल्वर लूटी गई थी। डकैत मकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर भी निकालकर ले गए थे। सूचना पर तत्कालीन डीआईजी, एसपी केबी सिंह, एसपी ग्रामीण, सीओ तिलहर और थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। दिनदहाड़े डॉक्टर के घर डकैती की घटना को पुलिस मीडिया से छिपाने की कोशिश करती रही। मामले ने जब तूल पकड़ा तो तिलहर पुलिस ने तीन लाख रुपये की नकदी, लाइसेंसी रिवाल्वर और 60 कारतूस की लूट की रिपोर्ट दर्ज की थी।
घटना में लापरवाही मानते हुए एसपी ने तत्कालीन थाना प्रभारी मनोज कुमार को निलंबित कर दिया था। घटना के जल्द खुलासे के लिए तत्कालीन एसपी केबी सिंह ने एसओजी की टीम लगाई थी और खुद एसपी ग्रामीण तिलहर थाने में करीब एक सप्ताह तक रहे। तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस घटना में शामिल डकैतों तक पहुंचने में नाकामयाब रही। डॉ. विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि पुलिस खुलासा करने के बजाये हमें और रिश्तेदारों को तंग करती रही। बाद में पूरी वारदात संदिग्ध मानते हुए फाइल ही बंद कर दी गई। अगर पुलिस ने संवेदनशील रवैया अपनाया होता तो डकैत निश्चित तौर पर पकड़े जाते।